succhiii

बिखरे बिखरे से अल्फ़ाज़

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Reposts
  • succhiii 3d

    @mirakeeworld
    मौजे-रानाई - joy of beauty
    वज्न - 212 , 212 , 212
    पेश-ए- ख़िदमद है एक साधारण सी ग़ज़ल ..अपनी मुहब्बतों से नवाज़िएगा ❤️

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    ग़ज़ल

    बिखरी है कैसी तन्हाई सी
    शामें-ग़म की है परछाई सी

    कहने को आयीं रूते सभी
    पर नहीं मौजे- रानाई सी

    डूबता जाता है दिल मिरा
    यादे ये उसकी हरजाई सी

    हँसते -हँसते जो रुला गया
    बातें उसकी वो सौदाई सी

    उसके ख़्वाबों के गलियारों में
    अच्छी लगती ये तन्हाई सी
    @succhiii

  • succhiii 7w

    @mirakeeworld
    तू इस तरह से मेरे ज़िंदगी में शामिल है
    जहाँ भी जाऊँ ये लगता है तेरी महफ़िल है

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    याद आता नहीं कुछ भी तेरे सिवा
    मेरा मुझमें नहीं कुछ भी तेरे सिवा
    मोड़ पर हैं खड़े राह के उस , जहाँ
    कुछ नहीं दिखता तेरी गली के सिवा

    अक्स तेरा ही है मेरे आईने में
    है नहीं ख़्वाब आँखों में तेरे सिवा
    लम्हा-लम्हा गुज़रता है ये वक़्त जब
    कोई आहट नहीं आती तेरे सिवा

    सजदे में बैठें हैं सर झुकाये हुए
    दर नहीं कोई भी ऐसा तेरे सिवा
    याद आता नहीं कुछ भी तेरे सिवा
    मेरा मुझमे नहीं कुछ भी तेरे सिवा
    @succhiii

  • succhiii 9w

    @mirakeeworld
    यूँ ही एक ख़्याल
    Living alone is really better than living with fake people .
    तिज़ारत - business

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    करते जो बातें बड़ी -बड़ी
    तिज़ारत करते उन्हें देखा है
    डूबी जब कश्ती दिल की
    किनारे खड़े उन्हें ही देखा है
    @succhiii

  • succhiii 11w

    @mirakeeworld
    मीटर 2212 2212 2212
    तिफ़्ल -child
    पासे-मुहब्बत -regard for love
    क़ादिर -सक्षम
    सात- साथ

    सादगी में ही उलझ गए वरना
    हम भी आसान होकर जी लेते
    _~कुमार विश्वास

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    ग़ज़ल

    पासे-मुहब्बत की जो आई बात है
    काटी सदा हमने ये ग़म की रात है

    क़ादिर हैं हम भी आसाँ होकर जीने में
    पर अपनी फ़ितरत की कहाँ ये बात है

    हम ज़ुस्तज़ू भी कहकशाँ की क्यूँ करें
    हरदम चमकता चाँद अपने सात है

    शायद वजह दरिया के इस सैलाब की
    ये जा ब जा अश्क़ो की जो बरसात है

    इक तिफ़्ल ज़िंदा रख तू ख़ुद में भी कहीं
    करना अगर आसाँ सफ़र की रात है
    @succhiii

  • succhiii 11w

    @mirakeeworld
    2212, 2212 ,2212 मीटर
    मजबूर थे ले आए किनारे पे सफ़ीना
    दरिया जो मिले हमको वह पायाब बहुत थे
    —अहमद फ़राज़
    पासे-मुहब्बत -regard for love

    क़ता

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    पासे-मुहब्बत की जो आई बात है

    हमने सहे ग़म तेरे ये दिन रात हैं

    पूछा नहीं जिसने सबब ख़ामोशी का

    कहने गए उससे ग़मे-हालात हैं
    @succhiii

  • succhiii 11w

    ‪हमेशा से संघर्षपूर्ण ज़िन्दगी से लेकर ख़ुद के अस्तित्व को एक मुक़ाम देने की जद्दोजहद में कुछ बेटियाँ जब खुले आसमान में परवाज़ भरती हैं ,उन्हें पता नहीं होता कि , कुछ हैवानियत के गिद्ध उनके पंख कतरने के लिए घात लगाए बैठे है, लेकिन अब समय है इन गिद्धों के पंख क़तरे जाए ताकि फिर कभी किसी बेटी के पंख नोचने की जुर्रत ना कर सके लेकिन कैसे ? हमेशा की तरह चीख़ चिल्ला के हम चुप हो जाए या कोई ठोस क़दम ‬उठाई जाए ,आज देश की हर एक बेटी के मन में यही सवाल है की ...कैसे कैसे ? 😢🙏🏻

  • succhiii 14w

    पैरहन -लिबास
    तकल्लुम- बातचीत
    पेश -ए-ख़िदमत है एक ग़ज़ल अपनी मुहब्बतों से नवाजिएगा
    कोई सुझाव हो तो स्वागत है 😊
    मीटर -2122 , 1122, 22

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    इक सदा दे के बुला लो मुझको
    रूठे बैठे हैं मना लो मुझको

    तेरी आँखों से निहाँ हूँ , लेकिन
    चाहो तो दिल में छुपा लो मुझको

    पैरहन खामुशी का ना अोढो
    दो सज़ा कोई सता लो मुझको

    वादा ना कोई तकल्लुम तुझसे
    ख़ुश है गर यूँ तो भुला लो मुझको

    सारे कच्चे घड़े मेरे यारब
    दरिया ये पार करा लो मुझको
    @succhiii

  • succhiii 16w

    @mirakeeworld
    मीटर 122 122 122 122
    @jayraj_singh_jhala

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    सफ़र

    सफ़र ज़िंदगी का सफ़र कर रहे हैं
    लिए ज़ख़्म सौ यूँ बसर कर रहे हैं

    तिरे ख़्वाब टूटे हैं यूँ बस मुसलसल
    है क्या सोचना क्यूँ फ़िकर कर रहे हैं

    सफ़र है कड़ी धूप का मानते हैं
    कहीं हो शजर भी, सबर कर रहे हैं

    है दस्तूर मिलते हैं अपनो से ही ग़म
    सो क्यूँ हम यूँ दीदा-ए-तर कर रहे हैं

    जलाए रखा है शमा यूँ सर-ए-शब
    ग़म-ए- तीरगी को ख़बर कर रहे हैं

    न बातें हैं ना अब गिले तुझसे कोई
    तुझे याद शामों-सहर कर रहे हैं

    सिफ़र से सिफ़र तक सफ़र “सूचि”है ये
    तो क्यूँ ज़िंदगी दर-बदर कर रहे हैं
    @succhiii

  • succhiii 16w

    दर्द ये शाख़ के पत्तो सा,टूटकर बिखर क्यूँ नहीं जाता
    घेर रखा है दरख़्त को , उड़ हवाओं संग क्यूँ नहीं जाता
    @succhiii

  • succhiii 19w

    @mirakeeworld
    बहर की दृष्टि से देखे 😃ख़यालात धरे के धरे रह गए , लिखना था कुछ और लिख कुछ और गए , बहर के चक्कर में अब हम भी फँस गए 😅 ज्ञानीजन त्रुटि सही माफ़ हो ..अभी तो सिख ही रही हूँ ...🙂 मीटर 2122. , 1212 , 22
    फाइलातुन मुफाइलुन फेलुन
    @jayraj_singh_jhala please check

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    जाने क्यूँ यूँ ख़फ़ा सा रहता है
    शख्स वो क्यूँ जुदा सा रहता है

    राब्ता तुझ से जब नहीं कोई
    जाने क्यूँ फिर हवा सा रहता है

    मिलता है ना बिछड़ता है या रब !
    जाने क्या सोचता सा रहता है

    भूलूँ भी तो यूँ कैसे भूलूँ जो
    धड़कनो की सदा सा रहता है

    जाए ना वो बिछड़ कही मुझसे
    लब पे हर -पल दुआ सा रहता है

    नाम लेता वफ़ा का कोई है
    जाने क्यूँ दिल डरा सा रहता है

    जाने पसरा है कैसा सन्नाटा
    घर का मौसम कजा़ सा रहता है

    जाने किस कश्मकश में है ये दिल
    ख़ुद से ही क्यूँ जुदा सा रहता है
    @succhiii