succhiii

बिखरे बिखरे से अल्फ़ाज़

Grid View
List View
Reposts
  • succhiii 4d

    सराब - भ्रम
    चश्म-आँख

    Read More

    हर सवाल का जवाब कौन दे
    हर अज़ाब का हिसाब कौन दे

    बह गये हैं चंद ख़्वाब चश्म से
    अब इन आँखो को सराब कौन दे

    ©succhiii

  • succhiii 1w

    @mirakeeworld
    ख़ुदाओं की निहायत बस्तियों में इन
    कोई इंसान दिखना भी ज़रूरी था

    मीटर 1222 1222 1222
    गुले-रूखसार -फूलो का चेहरा
    फ़साना - कल्पित कहानी
    मकतूब -ख़त
    मिन्हा -घटना , कमतर
    शादाब- हरा भरा
    सराब -मृगतृषा

    Read More

    ग़ज़ल

    गुले- रूखसार खिलना भी ज़रूरी था ।।
    कड़ी थी धूप जलना भी ज़रूरी था ।।

    किनारों पे फ़क़त चलते भी तो कब तक ..
    समुन्दर में उतरना भी ज़रूरी था ।।

    फ़सानो के सराबों में रहें उलझे ..
    कोई मकतूब लिखना भी ज़रूरी था ।।

    तुझे यूँ याद करके थक गया है दिल..
    कभी तो तेरा मिलना भी ज़रूरी था ।।

    ख़ुदाओं की निहायत बस्तियों में इन...
    कोई इंसान दिखना भी ज़रूरी था ।।

    ग़मों का बोझ कुछ मिन्हा हो जाता,इक ...
    ग़ज़ल शादाब कहना भी ज़रूरी था ।।
    @succhiii

  • succhiii 8w

    @mirakeeworld
    कभी-कभी लफ़्ज़ भी जता नहीं पाते .....जो अहसास जता जाते हैं
    मीटर 212 212 212 212
    दस्तरस- पहुँच

    Read More

    यूँ न लफ़्ज़ों के जादू से बाँधो मुझे
    दिल की गहराइयों से पुकारों मुझे

    तेरे ही दस्तरस में ये दिल है मेरा
    आज़मा के किसी दिन तो देखो मुझे
    @succhiii

  • succhiii 10w

    @mirakeeworld
    दिल-फिगारो — चिंताग्रस्त , पीड़ा , शोक ज़ख़्म
    एक सूफियाना कलाम पेश है आप सब की ख़िदमत में ..गौर फ़रमाइएगा ..और अपनी मोहब्बतों से नवाज़िएगा 💕🙏🏻
    मीटर 1222 1222 1222

    Read More

    ग़ज़ल

    तू है मेरे ख़यालों के दयारों में
    बसी ख़ुशबू तेरी हर सू नज़ारों में

    नहीं होगा कोई भी मेहरबाँ उन सा
    नहीं दिखती वो सूरत भी हज़ारों में

    गिला कोई नहीं है मौसमों से पर
    नहीं लगता है अब दिल इन बहारों में

    कहीं टूटे न पुल ये ज़ब्त के यारों
    गुहर ठहरे हैं पलकों के किनारों में

    खिला है चाँद उसकी यादों का वरना
    खो जाती ज़िंदगी इन, दिल-फिगारो में

    कभी भूला नहीं जो, याद क्या करना
    बसा जो रूह के चौकस हिसारों में

    रवाँ हर शय में तू ही है मेरे मौला
    तुझे ढूँढू किधर मैं, किन सहारों में

    है ख़ुद के रौशनी से “सूचि” तू रौशन
    ऐ दुनिया ! क्या रखा , तेरे शरारों में
    @succhii

  • succhiii 11w

    मीटर 122 122 122 122
    @mirakeeworld

    Read More

    गुज़र कुछ गया , कुछ गुज़ारा है हमने
    रखा याद कुछ , कुछ बिसारा है हमने

    पुराना है नाता यूँ तो ग़म से अपना
    सो इस तरह ख़ुद को सँवारा है हमने
    @succhiii

  • succhiii 11w

    मीटर 2122 2122 2122 2122
    @mirakeeworld

    Read More

    रोक ना पाया कोई , दरिया रवानी को तो तेरी
    यूँ तो आए राह में तेरे , किनारे कैसे-कैसे

    सम्त से तेरे दुआ जब आती है मेरे या रब्बा
    दीप बन जलते हैं, क़िस्मत के सितारे कैसे -कैसे
    ©succhiii

  • succhiii 14w

    मजनून -allusion संकेत इशारा

    पशेमाँ - लज्जित
    बरहम -नाराज़गी
    रूखसार- चेहरा

    मीटर - 2122 2122. 2122. 22
    रमल मुसम्मन मक्तुअ
    फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ैलुन

    Read More

    ग़ज़ल

    बहते दरिया की रवानी को चुराते कैसे
    कितना प्यासा है समुन्दर ये बताते कैसे

    तुझसे बरहम ना शिकायत कोई दुनिया से है
    रूठ ख़ुद से ही गये हम ,यूँ जताते कैसे

    तेरे वो मजनून-ए-ख़त ज्यूँ आसमाँ के तारे
    हर्फ़ों में लिपटी तेरी ख़ुशबू मिटाते कैसे

    तू बदल जायेगा हमदम ये नहीं सोचा था
    हम हुये यूँ भी पशेमाँ ,ये बताते कैसे

    पहली बारिश की फुहारों सी मुहब्बत तेरी
    सौंधी ख़ुशबू जैसे मिट्टी की, भुलाते कैसे

    देखकर उनको हँसे रूखसार के शबनम भी
    ज़हनी परतों की उदासी, हम दिखाते कैसे

    शाम ना ही ये सहर अपनी न मंज़िल अपनी
    “सूचि” हम हैं किस गुज़र के ये बताते कैसे
    @suchhiii

  • succhiii 17w

    @mirakeeworl
    वसवसा - temptation ,,दुविधा ,
    तग़ाफ़ुल- उपेक्षा Ignorance

    Read More

    ग़ज़ल

    वस्ल ये तेरा, क्यूँ ख़्वाब सा रह गया
    हिज्र का जैसे अब सिलसिला रह गया

    बारहा ज़ख्म सहते तग़ाफ़ुल के हम
    कहते -कहते ये दिल कुछ, बुझा रह गया

    सुब्ह का तारा आता नहीं क्यूँ नज़र
    शब की पेशानी पे वसवसा रह गया

    ज़ब्त आँखों ने की थी बहुत यूँ मगर
    लब हँसें ,दिल में कुछ सालता रह गया

    तेरा कंधा अगर मिलता रो लेते, पर
    तेरी आँखों में भी कुछ छुपा रह गया

    चाहा था रोकूँ जाती बहारों को पर
    यूँ हवायें चली बस खला रह गया

    याँ तवज्जो वफ़ाओं को जिसने भी दी
    “सूचि “ वो बारहा टूटता रह गया
    @succhiii
    मीटर ..212 212 212 212

  • succhiii 20w

    Love yourself 💕💕❤️
    @mirakeeworld

    Read More

    नई चेतना

    हे नारी तू गढ़ अपनी नूतन परिभाषा ।
    रख ना व्यर्थ जगत से तू मिथ्या अभिलाषा ।।

    बना आसमाँ एक नया अपना नूरानी ।
    ख़ुद से लिख दे तू अपनी अस्तित्व कहानी ।।

    नहीं आएगा कोई पग के काँटे चुनने ।
    कोमल ख़्वाब तेरी इन आँखो के बुनने ।।

    चुप क्यूँ खड़ी अथाह अगाध समुन्द्र किनारे ।
    तेरी आँचल में ही छुपे ये चाँद सितारे ।।

    राहें दिखलाए तुझको जुगनु की टोली ।
    आँचल को परचम करके तू जब-जब बोली ।।

    नारी शक्ति है प्रेम अर्ध्य ममता की अंजलि ।
    सदा वासना की वेदी पर क्यों होती बलि ।।

    माँग नहीं भीख, हक़ छीन ले अपना ।
    अनपूर्णा हे ! तू तनिक भी देर न करना ।।

    है तुझपर साया सात आसमानो सा ।
    हाथ उठा, एक बार दम्भ हर बलवानो का ।।

    तुझमें है चंडी,सरस्वती दुर्गा की दीप्ति ।
    पहचान , तुझमें ही छुपी ब्रह्मांड की शक्ति ।।
    @succhii

  • succhiii 22w

    आप सब को यह बताते हुए अत्यंत हर्ष की अनुभूति हो रही है , कि wingword poetry’ प्रतियोगिता ने मेरी चयनित रचना को अपने नए संस्करण “राग पलाश “ पुस्तक में स्थान दिया है 😊 मित्रों , आप सब के साथ और प्रोत्साहन से ही यह सब कुछ संभव हो पाया , अपनी इस ख़ुशी में आप सब को शामिल कर , आप सब का धन्यवाद करना चाहती हूँ 🙏🏻💕😊
    @mirakeeworld

    Read More

    ..