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  • syaahiii 4d

    कुछ मेरे दिल की

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    सफ़र और यादें

    मुझे मंज़िलों से इश्क़ है पर जाने क्यों सफ़र
    से खौफ़ आता है कि कहीं दूर ना हो जाऊं
    अपने आप से , मेरी जिंदगी और मेरी यादों से!
    पर फिर यूँ लगता है कि अगर सफ़र
    में मैं दिलचस्पी लूँ तो शायद मुझे सफ़र
    से भी प्यार हो जाए, गैर भी मेरे यार
    हो जाएँ और मेरे अपने मेरे लिए बेकरार हो जाएं!

    मैं भी देखना चाहती हूँ कि कैसा लगता
    होगा ऐसे सफ़र में जहाँ सिर्फ
    यादों से लम्हें बन जाएं और पुराने लम्हें
    यादों के रूप में मेरे दिल पर बसर हो जाएं!

    पर ऐसा भी लगता है कि अगर
    मुझमें संतुष्टि आ जाए तो मुझे शायद
    कभी इससे गुज़रने की ज़रूरत ही ना पड़े,
    मुझे खुशियाँ, हसीन पल, हमसफर
    भी शायद यहीं मिल जाए!

    वैसे मैं अक्सर ये सब कुछ सोचती
    रहती हूँ पर फिर लगता है
    मेरा परवर दीगार जो मेरे लिए
    मंज़िल चुनेगा, हो सकता है वो मेरे
    सफ़र को भी मंज़िल से भी ज़्यादा प्यारा
    बना दे, मेरी तसल्ली को बिगाड़ कर
    शायद नए रेहगुज़ार पर अग्रसर कर दे!

    अगर ऐसा हो जाए तो क्या मैं
    अपने दुख भरी यादों को भी मिटा पाऊँगी,
    क्या उन्हें दिल से निकाल पाऊँगी,
    मेरे इरादों को मुत्मइन कर पाऊँगी,
    खुद को हमेशा अच्छे ही रहने की दिलासा दे पाऊँगी ?

    मैं अपना हर एक लम्हां सुकून
    और सादगी से बिताना चाहती हूँ,
    मैं सफ़र की यादों में ढल जाना चाहती हूँ,
    हर अपनी चीज़ को सहजता से अपनी
    जिंदगी में रखना चाहती हूँ चाहे
    फिर वो किसी की बातें हों, मोहब्बत हो
    ख़्वाब हो, उनकी कोई नादानी
    या कोई भी निशानी!

    ©स्याही

  • syaahiii 1w

    ᴇᴠᴇʀʏᴛɪᴍᴇ ɪ ꜰᴇʟᴛ ꜱᴏᴍᴇᴛʜɪɴɢ
    ɢʟɪᴍᴍᴇʀɪɴɢ ɪɴ ᴍʏ ʜᴇᴀʀᴛ
    ᴡʜᴇɴ ʏᴏᴜ ᴡᴇʀᴇ ᴀʀᴏᴜɴᴅ ,
    ᴇᴠᴇʀʏ ᴛᴏᴜᴄʜ ᴡᴀꜱ
    ꜱʟɪᴄᴋ ᴀɴᴅ ᴘᴀꜱꜱɪᴏɴᴀᴛᴇ
    ᴡʜᴇɴ ʏᴏᴜ ᴍᴀᴅᴇ ᴍᴇ ᴄʀᴏᴡɴᴇᴅ

    ᴇᴠᴇʀʏᴛɪᴍᴇ ɪ ꜰᴇᴇʟ ᴘʟᴇᴀꜱᴀɴᴛ
    ᴡʜᴇɴ ʏᴏᴜ ʜᴜᴍ ꜰᴏʀ ᴍᴇ ,
    ᴇᴠᴇʀʏ ʟɪɴᴇ ᴡᴀꜱ ꜰᴀꜱᴄɪɴᴀᴛɪɴɢ
    ᴀɴᴅ ꜰɪʟʟᴇᴅ ᴡɪᴛʜ ɢʟᴇᴇ

    ᴇᴠᴇʀʏ ᴍᴏᴠᴇ ᴡᴀꜱ ᴄʀɪᴄᴋ
    ᴡʜᴇɴ ʏᴏᴜ ᴍᴀᴅᴇ ᴍᴇ ꜱᴡɪʀʟᴇᴅ ,
    ᴇᴠᴇʀʏ ɢᴇꜱᴛᴜʀᴇ ᴡᴀꜱ ɪɴꜰᴀᴛᴜᴀᴛᴇᴅ
    ᴡʜᴇɴ ʏᴏᴜ ᴍᴀᴅᴇ ᴍᴇ ᴘᴇᴀʀʟᴇᴅ

    ᴇᴠᴇʀʏ ᴍᴏʀɴɪɴɢ ᴡᴀꜱ ʙᴀʟᴍʏ
    ᴡʜᴇɴ ʏᴏᴜ ᴍᴀᴅᴇ ᴛʜᴀᴛ ᴀᴅᴏʀɪɴɢ ꜰᴏʀ ᴍᴇ ,
    ᴇᴠᴇʀʏ ɴɪɢʜᴛ ᴡᴀꜱ ʙʟɪꜱꜱꜰᴜʟ
    ᴡʜᴇɴ ʏᴏᴜ ᴍᴀᴅᴇ ᴛʜᴀᴛ ᴋɪꜱꜱ ɢᴇɴᴛʟᴇ ᴀɴᴅ ꜰʀᴇᴇ .



    ©ꜱʏᴀᴀʜɪɪɪ

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    .

  • syaahiii 1w

    खानाबदोशों का ठिकाना ना होकर भी उनके दिल का मकान कितना बड़ा होता होगा क्या सोचा है कभी ?
    खैर जाने दो तुमसे क्या कहुँ तुमने दिल में तो क्या यादों में भी कहाँ कोई ठिकाना दिया मुझे !

    -स्याही

  • syaahiii 1w

    तू क्या वो पुराना मकान तलाशने चला है
    वो तो कब का ढ़ह गया होगा ना
    बरसातें तुफ़ानों के साथ क्या कम
    आई हैं
    और तू बात करता है फिर
    उन्हीं कच्चे रस्तों पर से जाने की
    वो तो अब पक्की भी हो गई हैं
    सरकारें योजनाओं के साथ क्या कम
    आई हैं !

    -स्याही

  • syaahiii 2w

    मैं नहीं कहती
    ------------------
    ����������

    मैं नहीं कहती तुमसे कि
    मुझसे मोहब्बत करो तुम
    पर हाँ नफ़रत क्यों ना एक दफ़ा
    कर कर देख लो

    मैं नहीं कहती कि
    मेरी बातें सुनो तुम
    पर हाँ क्यों ना एक
    दफ़ा अनसुनी कर कर देख लो

    मैं नहीं कहती कि
    मुझसे नज़र मिलाओ तुम
    पर हाँ क्यों ना एक
    दफ़ा नज़रे चुरा कर देख लो

    मैं नहीं कहती कि
    मेरे पास आकर बैठो तुम
    पर हाँ क्यों ना एक
    दफ़ा सामने से जाकर देख लो

    मैं नहीं कहती कि
    मेरी कविताएँ पढलो तुम
    पर हाँ क्यों ना एक
    दफ़ा इनको इंकार कर कर देख लो!

    -स्याही

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    .

  • syaahiii 2w

    तुम हो

    ~•~•~•~•~•~•~•~•~

    मेरा मधुर संगीत तुम हो
    मेरे दिल की प्रीत तुम हो
    मेरी सदियों की रीत तुम हो ,
    मेरे जज़्बात जानो
    स्याही के मनमीत तुम हो !

    मेरी टूटी कसम तुम हो
    मेरा देखा भ्रम तुम हो
    मेरी स्याही की कलम तुम हो ,
    मेरे प्यार को समझो
    ईश्वर का मुझपर करम तुम हो!

    मेरी जिंदगी तुम हो
    मेरी बंदगी तुम हो
    मेरी सादगी तुम हो
    मुझे पागल ना समझो
    सच है मेरी
    मौसिकी तुम हो!

    मेरा प्यार भरा जीवन तुम हो
    मेरा शब्दों का उपवन तुम हो
    मेरी भावनाओं में
    दिल से बंधन तुम हो
    मेरी प्रार्थना करने का
    भजन तुम हो!

    मेरी आस तुम हो
    मेरा लिबास तुम हो
    मेरी जिंदगी में प्रेम
    का उपन्यास तुम हो
    मेरी कविताओं की
    कभी ना बुझने वाली
    प्यास तुम हो!

    मेरी आशा तुम हो
    मेरी हताशा तुम हो
    मेरी कभी पूरी
    ना होने वाली
    अभिलाषा तुम हो
    मेरे जीवन में प्रेम की
    निराली भाषा तुम हो!

    मेरे लिए असल प्रेम
    की अनुकृति तुम हो
    मेरे जीवन में मेरी
    अनुभूति तुम हो
    मेरे हृदय की
    सहानुभूति तुम हो

    ©स्याही

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    .

  • syaahiii 2w

    ᴛʜᴏꜱᴇ ᴏʟᴅ ᴅᴀʏꜱ

    ɪ ᴍɪꜱꜱ ᴛʜᴏꜱᴇ ᴏʟᴅ ᴅᴀʏꜱ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ɢᴏʟᴅᴇɴ
    ᴀɴᴅ ᴍʏ ʜᴇᴀʀᴛ
    ɪꜱ ꜰᴜʟʟ ᴏꜰ ᴘʀᴀɪꜱᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ʟᴏᴠᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ʙᴇᴀᴜᴛɪꜰᴜʟ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴇɴᴏᴜɢʜ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴛʀᴀɴQᴜɪʟ
    ᴀɴᴅ ᴘᴇᴀᴄᴇꜰᴜʟ.

    ɪ ᴍɪꜱꜱ ᴛʜᴏꜱᴇ ᴏʟᴅ ᴅᴀʏꜱ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ɢᴏʟᴅᴇɴ
    ᴀɴᴅ ᴛʜᴇʏ ꜱᴛɪʟʟ
    ᴍᴀᴋᴇ ᴍᴇ ᴀᴍᴀᴢᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ʙʀɪɢʜᴛ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴡᴀʀᴍ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴘᴏʟɪᴛᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ
    ᴄᴏᴍꜰᴏʀᴛɪɴɢ ᴀʀᴍ.

    ɪ ᴍɪꜱꜱ ᴛʜᴏꜱᴇ ᴏʟᴅ ᴅᴀʏꜱ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ɢᴏʟᴅᴇɴ
    ᴀɴᴅ ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ
    ɢᴀᴜᴅʏ ʙʟᴀᴢᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ɢᴏʀɢᴇᴏᴜꜱ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ꜰᴀꜱᴄɪɴᴀᴛɪɴɢ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ꜰʟᴀᴡʟᴇꜱꜱ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴀᴍᴀᴢɪɴɢ
    ᴀɴᴅ ᴇɴɢᴀɢɪɴɢ.

    ɪ ᴍɪꜱꜱ ᴛʜᴏꜱᴇ ᴏʟᴅ ᴅᴀʏꜱ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ɢᴏʟᴅᴇɴ
    ᴀɴᴅ ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ
    ᴀʙꜱᴛʀᴀᴄᴛᴇᴅ ᴅᴀᴢᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴘᴜʀᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴅɪᴠɪɴᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴀʟʟᴜʀᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴛʜᴇ
    ꜱᴏᴏᴛʜɪɴɢ ꜱᴜɴꜱʜɪɴᴇ.

    ɪ ᴍɪꜱꜱ ᴛʜᴏꜱᴇ ᴏʟᴅ ᴅᴀʏꜱ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ɢᴏʟᴅᴇɴ
    ᴀɴᴅ ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ
    ᴛʜᴇ ᴄᴏɴꜰᴜꜱɪɴɢ ᴍᴀᴢᴇ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ꜰᴀᴛᴇꜰᴜʟ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴅᴇᴀʀᴇꜱᴛ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ʙʟɪꜱꜱꜰᴜʟ
    ᴛʜᴇʏ ᴡᴇʀᴇ ᴘʟᴇᴀꜱᴀɴᴛ
    ᴀɴᴅ ᴄʟᴇᴀʀᴇꜱᴛ.

    ~ꜱʏᴀᴀʜɪɪɪ

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    .

  • syaahiii 2w

    उनसे कहना वो उस
    सितारे की तरह हैं जो
    कभी अपनी जगह नहीं
    बदलता नाहीं आकाश में
    और ना ही मेरे दिल में !

    वो हमेशा जिंदगी
    का खूबसुरत पहलु
    कहलाए जाएंगे मेरी
    जिंदगी का और
    हमेशा मेरा खयाल
    करकर मुस्कुराएँगे
    मुझ जैसी अहमक
    लड़की पर क्योंकि
    मैं उन्हें कभी
    समझा ना पाई
    और ना ही वो
    कभी मेरी भावनाएं
    समझ पाए !

    मैं बस उनसे
    दूर जाना
    चाहती हूँ
    क्योंकि वो
    भी यही
    चाहते थे
    मुझे अपना
    कह कर
    भी अपने
    आप से
    दूर करना
    चाहते थे

    मैं भी कितनी
    पागल हूँ काश कि
    कुछ उनकी भी समझ
    पाती थोड़ी अपनी
    कहती थोड़ा उन्हें
    मेरे भावों का बता पाती

    वो अब कभी नहीं
    आयेंगे दिल तुम ये जानलो
    अपने आप को जैसे
    भी पर ये बात समझा दो
    अगर आएंगे उन्हें
    मैं फिर भी ना मिलूँगी
    अब बस मैं उनकी
    यादों में ही जी लूंगी!

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    उनसे कहना मैं अब
    उन्हें कभी नहीं मिलूँगी
    ख्वाबों में भी नहीं
    बेशक़ वो जिंदगी है
    मेरी पर उनसे कहना
    मैं अब उन्हें कभी
    नहीं मिलूँगी

    वो मूझसे खुद को
    भुल वाना चाहतें हैं
    पर मैं उन्हें कभी
    नहीं भूलूंगी और
    कभी भूलने का सोच
    भी नहीं सकती
    ख्वाबों में भी नहीं

    मैं उनके बिना
    रह लूंगी मगर
    उनकी यादों के बगैर
    कभी नहीं रह पाऊँगी
    मैं हमेशा उन्हें
    याद करूँगी
    उनकी यादों में मैं
    कविता लिखा करूँगी

    मैं उनसे और नहीं
    कह सकती की
    वो क्या हैं मेरे लिए
    ना हीं कभी अब
    उन्हें समझाना चाहूँगी
    मैं उन्हें कभी
    नहीं भूलुंगी बस
    उनकी यादों के
    साथ जी लूंगी

    वो मुझे एक
    सुंदर रूह कहते थे
    और ये मुझे
    सदा याद रहेगा
    मेरा दिल हमेशा
    उनके लिए ढेरों
    दुआएँ कहेगा

    मेरे लेखन में
    सदा यूँही रहेंगे
    मेरे फूल भी मुझे
    पागल कहेंगे
    मैं इतना चाहूँगी
    हमेशा तुम्हें
    हर पल जीऊँगी
    उन बातों के
    सहारे ही जो वो
    मुझसे कहा करते थे

    उन्होंने हर मुमकिन
    कोशिश की मैं
    कभी ना रोऊँ
    शायद उन्हें नहीं
    पता कि इस
    सिलसिले में ये
    कभी मुमकिन
    हो ही ना पायेगा
    कोई मुझे उनकी
    याद में रोने से
    रोक ही ना पाएगा

    मैंने बेशक़ उनसे
    अलविदा कर दी है
    पर उनका वजूद
    वो खुद भी नहीं
    मिटा पाएंगे मेरी
    यादों से!

    काश की वो ये
    कभी ना पढ़ें
    काश की वो
    कभी ना समझें
    क्योंकि अब नाहीं
    ये सब का
    कोई सबब है
    और नाहीं
    उनके पास मैं
    ©-स्याही

  • syaahiii 2w

    //फूलों की जान//


    आज जब उन्होंने
    मेरे फूलों को तोड़ा,
    मुझे बहुत ही ज्यादा
    दुख हुआ,
    वो आज ही खिले थे
    मैं उन्हें देख भी ना पाई
    उनसे मिल भी ना पाई
    मेरा आज बहुत बहुत
    मन था उन्हें सहलने का
    उनसे प्यार करने का
    मुझे आज बहुत
    ही अफ़सोस है मैं
    उन्हें बचा ना सकी,
    मुझे आज बहुत
    ही अफ़सोस है मैं
    उन्हें देख भी ना सकी ,

    क्या उन्हें भी हुआ होगा?
    क्या उन्हें प्यारे फूलों की
    जान का नहीं सोचा होगा ?
    काश वो मेरे फूलों
    के प्रति मेरे स्नेह
    को देख पाता
    मुझे यकीन है
    मेरी मोहब्बत पर
    वो मेरा दिल कभी
    ना दुखाता ना ही
    मेरे प्यारे फूलों को
    यूँ तोड़ कर ले जाता
    मुझे आज बहुत
    ही अफ़सोस है मैं
    उन्हें बचा ना सकी,
    मुझे आज बहुत
    ही अफ़सोस है मैं
    उन्हें देख भी ना सकी

    -स्याही

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    .

  • syaahiii 2w

    दिल चाहता है

    मेरा झूठों पर भी यकीन
    करने को दिल चाहता है
    मैं चाहती हूँ कि सब
    एक दूसरे से प्यार करें
    मेरा सबसे मोहब्बत
    करने को दिल चाहता है

    मेरा झूलों पर घँटों
    झूलने का दिल चाहता है
    मैं चाहती हूँ कि मुझ
    पर कोई पाबंदी ना हो
    मेरा आसमान से बातें
    करने को दिल चाहता है

    मेरा तितलियों के संग
    खेलने को दिल चाहता है
    मैं चाहती हूँ मैं उनके
    बीच यूँही बैठी रहूँ
    मेरा उनके राज़ जानने
    को दिल चाहता है

    मेरा मंद मंद धूप
    सेकने का दिल चाहता है
    मैं चाहती हूँ कि मैं वहाँ
    बैठकर खूब मुस्कुराऊं
    मेरा सूरज से दोस्ती
    करने का दिल चाहता है

    मेरा बारिशों में झूमने
    का दिल चाहता हैं
    मैं चाहती हूँ कि बुँदे
    मूझसे बहुत प्यार करें
    मेरा हर मौसम में बरसात
    कराने का दिल चाहता है

    मेरा समुंदर किनारे
    चलने का दिल चाहता है
    मैं चाहती हूँ वो
    शाम कभी भी ना ढले
    मेरा वहीं कहीं खो
    जाने को दिल चाहता है

    मेरा रात में सितारों को
    ताकने का दिल चाहता है
    मैं चाहती हूँ कि नन्हें सितारों
    के आगे बादल कभी ना आए
    मेरा सितारों के साथ
    टिमटिमाने को दिल चाहता है

    मेरा उस शख़्स को करीब से
    जानने को दिल चाहता है
    मैं चाहती हूँ वो
    हमेशा मेरे साथ रहे
    मेरा उसको भी मोहब्बत
    सिखाने को दिल चाहता है

    मेरा हर किसी को खुश
    देखने का दिल चाहता है
    मैं चाहती हूँ खुशी का
    सबब भी सबका मैं बनु
    मेरा हर पराए को भी
    अपना मानने का दिल चाहता है


    -स्याही