tathagatthakur22

I write what I feel I've a connection with my wordz

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  • tathagatthakur22 2w

    आज क़यामत से मुलाक़ात हुई ..
    कहा उसने अब संभलने का वक़्त है।
    विचारों को सारांश देकर आदतों को बदलने का वक़्त है।

    मुसलसल ढूँढता रहा है मंज़िल उनलोगों में जो खुद लापता हैं..
    बोहोत चला उनके पीछे पीछे।।अब थोड़ा खुद के संग चलने का वक़्त है।

    @tathagatthakur

  • tathagatthakur22 2w

    Mohabbat Aur haisiyat Ki Jung mein unhone haisiyat ka Khumar Kiya
    Aur is khairiyat bhari Mohabbat se na jaane Kyun Nafrat beshumar Kiya
    Bas in shaakhon aur patton ne humari Khamoshi ko samjha hai
    Siyasat ki Shaukeen thi wo shayad!!
    Jisne Khud Gunahein Ki aur hume janaze me giraftaar Kiya

    @tathagatthakur

  • tathagatthakur22 3w

    समय

    समय तो एक युद्ध है।। जो खड़ा हम सब के विरुध्द है
    समय ही मृत्यु समय ही जीवन।। समय सरोवर समय शुध्द है
    समय ही शून्य और समय ही अनंत।। समय ही स्वाधीन है
    समय न छल जाने न कपट।। समय बस अनुशासन के अधीन है

    समय के साथ निखार है और विपरित हो तो बस तिरस्कार है
    समय न भूत का साथी और न ही भविष्य के अधीन।। समय को बस वर्तमान में चलते रहने का अहंकार है
    जिसे देखो समय की तलाश है।। यूं तो सबकी अधुरी इक आस है
    समय ही चोट समय ही घाव और समय ही दर्द।। यूं तो हर कोई समय से हताश है
    समय तो एक युद्ध है।। जो खड़ा हम सब के विरुध्द है

    @tathagatthakur

  • tathagatthakur22 3w

    गूरूर था उसे कि उसके पीछे हम थें
    खुद कि खुशी के खातिर उसने हमारी हथेली पर लिखें गम थें
    जिसे हम मजःबूत समझते थे आज उसि ने मजबूर कर दिया
    वरना उसकि चाहत में हमने अपने चाहने वाले रखें कम थें

    @tathagatthakur

  • tathagatthakur22 4w

    वक़्त बीत जाता है मगर ये इंतजार कभी खत्म होता नही।

    इस आशिकी के रंग मंच में आशिक मिट जाता है मगर ये किरदार कभी खत्म होता नहीं।

    @tathagatthakur

  • tathagatthakur22 4w

    वो नींद न आने वाली रातों की सारी निशानि याद आगई
    हमे सुलाने के लिए माँ की बनी बनाई सारी झूटी कहानि याद आगई
    माँ ये लादो ।माँ वो करदो। और ना जाने कितनी ही फर्माइशें करते थे
    याद आगई वो रातें जब हम तूम्हे देर तक जगाया करते थे
    वो चूल्हे चौके में रोजः ही तप कर अपने हाथों से खाना खिलाति थी
    उसके बैहते पसीने नजःर अंदाजः कर हम रोजः ही लेट होने पर उसपे चिलाया करते थे।
    जाने अनजाने में ही सही पर मुझको मेरी वो सारी नादानि याद आगई
    ऐसे बुरे फसे हैं इन करवटों और चूल्हों के झमेले में कि नानी याद आगई।

    @tathagatthakur

  • tathagatthakur22 5w

    आगे कुआँ पीछे खाई है पर डर तो पैसों में समाई है
    मुश्किल यहाँ कुछ भी नही अगर इरादों में सच्चाई है
    ये ज़िन्दगी तो शब्दों की खामोशी से लड़ाई है
    दर्द है जिसके सीने में।।उसके शब्दों में ही गहराई है

    @tathagathakur

  • tathagatthakur22 6w

    लफ़्ज़ों की दरिया में तैरना ज़रूरी है
    दर्द तुम्हारा हमसफर नही मगर सैहना ज़रूरी है
    ज़रूरी नही हर मसलों का तुम रहबर से इक़रार करो
    ज़ुबान पे खामोशी सही मगर कागज़ के पन्नो पे तो ऐतबार करो

    @tathagatthakur

  • tathagatthakur22 6w

    ये देख कर परिंदे भी हैरान होगए
    वो कैहकहे के मेले आज कब्रिस्तान होगए
    हालात संभलने नही देते और सितमगर साथ चलने नही देते
    नापाक सियासत थी किसी की जिसमे छतें और दीवारें भी हिन्दू मुसलमान होगए
    मज़्ज़हब परस्ती की कट्टरता में कुछ यूँ गुमनाम होगए
    कुछ कट्टर रह गए तो कुछ भाई जान होगए

    @tathagatthakur

  • tathagatthakur22 7w

    हमारे गुनाहों की सज़ा हमे अपने साथ लेकर चलते हैं
    हम अकेले नही पर दवा और दुआ भी साथ लेकर चलते हैं
    गालिब वस्ल-ए-इश्क़ में डूबने को अच्छा नही बताता है
    हम डूबने के लिए समंदर का साथ लेकर चलते हैं

    @tathagatthakur