tengoku

you can come and cry in here. it's still quite dark but peaceful.

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  • tengoku 3d

    Somewhere,
    all writers wish for an empty mind,
    some old brandy and a silent incomplete
    prose,

    to sleep on.







    -Ananya

  • tengoku 1w

    हमारा अथेइस्ट होना उसे रत्ती भर भी नहीं भाता था। इसी वजह से हर मंगलवार ज़बरदस्ती हाथ खींचकर मंदिर को ले जाया करती थी हमें। हम भी मुंह बिचकाकर चल देते थे।
    'ओफ्फो! जाना ज़रूरी है क्या?'
    'जी। बिल्कुल ज़रूरी है।'
    'पर क्यूं? प्रिया को देखो सिनेमा देखने जाती है राहुल के साथ। और एक तुम हो!'
    'हम प्रिया नहीं। और नाही आप राहुल।'
    'धत्त।'
    स्कूटी की सीट खोलकर पहले तो अपना हेलमेट हमें पहनाती और फिर गंभीरता से समझाती,
    'ध्यान से बैठिएगा।'
    हम भी उसे इतना ही कसकर पकड़कर बैठते थे जितना उसकी स्पीडोमीटर की सुई 20 को।

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    मंदिर के बाहर भीड़ देखते ही, हमारा बायां हाथ अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया करती थी। और हमें कहती
    'हाथ मत छोड़िएगा। कहीं खो मत जाइएगा।'
    आदत थी उसकी, पहले तो फूलवाले से दो रुपए का डिस्काउंट लेने पर पूरे रस्ते इतराती।
    'देखिए, ऐसे खरीदारी होती है।'
    'अच्छा जी।' हमसे हसीं ना रुक पाई।
    'हंसने की क्या बात है इसमें भला? इन लोगों से थोड़ा बहस ना करो तो लूट ही लेंगे! आपको कुछ नहीं पता।'
    'हां बाबा। ठीक कहती हो तुम।'
    'हुंफ़!' और हमारे हंसने पर चिढ़ जाया करती थी।

    उसके हाथ जोड़ते और आंखें बंद करते ही, हम एकटक उसे देखने लगते। ना जाने वह क्या मांगती थी इतना लीन होकर। बीच बीच में कुछ बुदबुदाती, फिर चुप हो जाती। हम भी उसके आंखें खोलने से पहले, झट से आंखें बंद कर लेते।
    'क्या मांगा?' आंखें खोलते ही हमसे पूछा।
    'उम्म.. हम क्यूं बताएं?'
    'बताइए ना!'
    'लै? दुआ को ही बता दें क्या दुआ मांगी?'
    ये सुनते ही लजा के मुस्कुरा दिया उसने।
    मंदिर के बाहर पानी का एक कुण्ड था। थोड़ी देर दोनों वहां बैठा करते थे। हमारे लिए ये पल सबसे हसीन होता था।
    इतने में उसने धीरे से हमारी दाई कलाई अपने हाथ में ली और लाल धागा बांध दिया।
    'अब ये किस लिए?'
    'अब हम हर वक़्त तो होंगे नहीं आपके पास, तो ये धागा होगा। मान लीजिए हम ही हैं। हां ये ठीक है। हर वक़्त आपके साथ।'
    'तुम ना, थोड़ा सिनेमा कम देखा करो। पागल कहीं की।' ये कहकर हम हंस दिए।
    'हां ठीक है। हुंफ़!'
    अंत में घर जाते वक़्त दोनों ने दस का गोलगप्पा खाया। नहीं नहीं! हमारे दस के गोलगप्पे में से पांच का तो वह ही खा गई थी। हमारी स्पीड उसके जितनी नहीं थी ना।

    खैर, आज भी मंगलवार है। बैठे हैं मंदिर के बाहर। कुण्ड के पास। अकेले, उसके बिना।
    हर हफ़्ते आते अब। आदत जो हो गई है अब।
    हां अथेइस्त तो अभी भी हैं। फर्क बस इतना होता है कि अब, दुआ मांग लिया करते हैं, अपनी दुआ के लिए।
    और हां, वो लाल धागा थोड़ा कमज़ोर हो गया,
    ना जाने कब टूट जाए,
    हमारी आस की तरह।
    हां पर है बंधा अभी भी,
    हमारी आस की तरह।


    -अनन्या

  • tengoku 1w

    He sang nothing,
    but stories of my scars.
    I kissed nothing,
    but his soul and his heart.







    -Ananya

  • tengoku 2w

    "sometimes you've to be scattered"
    smiled a broken.
    "to become the brightest constellation in the sky"






    -Ananya

  • tengoku 2w

    Edit- Sorry. I was drunk last night.

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    प्रेम कभी मरता नहीं। कभी नहीं। बस कभी कभी, समय के साथ साथ महीन हो जाता है। हवा सा महीन। फरवरी की ठंड सा महीन। इतना महीन के शायद प्रेम में पड़े किसी एक साथी को ही इसका एहसास होना बंद हो जाता है। एक साथी, प्रेम के महीन और पुराने होने से संतुष्ट होता है वहीं दूसरे को उसके दिखाई ना देने की घबराहट होती है। यही घबराहट कुछ समय बाद, कब उसे प्रेम के ना होने का विश्वास दिला देती है, कुछ पता ही नहीं चलता।

    तुम्हारी घबराहट साफ दिखाई दी थी हमें। फिर एक दिन एकदम से सब कुछ शांत हो गया था। ऐसा लगा था जैसे तुम्हारी सारी बेचैनी हमने खुद में ले ली हो। हमेशा के लिए।
    खैर,
    लोगों की कुछ यादें काफी ज़िद्दी होती हैं। प्रेम के महीन होने के बाद भी, सालों तक, कहीं किसी कोने में छिपी रहती हैं। शायद प्रेम में बचे अकेले साथी को, प्रेम के अधूरे और जीवित होने का एहसास दिलाने के लिए।

    जैसे देखो, आज भी हमारी कुल्फी की लास्ट बाइट का आधा हिस्सा तुम्हारा ही होगा। हालांकि हमने तुम्हारे जाने के बाद से खाई नहीं। शायद खाए भी ना कभी। पर फिर भी।

    तुम्हारे नाम की रातें अब खुदके साथ बितानी काफी मुश्किल लगती हैं। फिर भी, आज भी हम पूरा दिन इंतज़ार करते हैैं, इन रातों का। बस फर्क सिर्फ इतना होता है कि इंतज़ार तुम्हारे साथ समय बिताने के बजाय तुम्हे याद करने का होता है।

    "मन करता है तुम्हारे पास आऊं।"
    तुमने उस रात फोन पर कहा था। कौनसी रात थी? देखो अब हमें कुछ याद भी नहीं रहता।
    "फिर?"
    "और पास आऊं।"
    "फिर!?"
    "और पास।"
    "आगे?"
    "और फिर तुम्हारी आंखों में.."
    "हां?"
    "..संतरे का छिलका निचोड़कर भाग जाऊं।"
    "पागल कहीं के।"
    ना जाने कब तक हम दोनों साथ में हंसे थे उस रात।
    आज भी वो रातें याद कर हंसी आती है। फर्क बस इतना होता है कि, आंखों में नमी और तुम्हारा पास ना होना, साथ रहता है।

    अच्छा सुनो ना,
    तुम्हारी यादें अब कुछ कुछ स्याही सी महकने लगीं हैं। कभी फुर्सत हो तो आके पढ़ जाना। क्या पता महीन प्रेम के होने का एहसास हो जाए।
    क्या पता।




    -अनन्या

  • tengoku 2w

    #HBDP Friday, 12th February 2021.
    You're the strongest, sweetest and most beautiful soul.
    Happy birthday Jinia @jiniaa

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    She isn't just a girl.
    She is the most alluring war you will
    never know about,
    because she is dug deep beneath
    a mesmerising smile,
    smelling like a warm cup of coffee,
    your favourite old torn novel,
    a cozy corner of balcony and
    a rainy afternoon.







    -Ananya

  • tengoku 2w

    I was a huddle of cursed words,
    on the torn piece of sin.
    You chanted me like a holy prayer,
    slowly slowly in tiny bits.









    -Ananya

  • tengoku 3w

    He is that kind of song,
    you listen to cry all night.









    -Ananya

  • tengoku 4w

    Thank you WN and ooh hoo hoo bade sahab Mirakee.

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    I aspire to be
    a human


    I inhale and the war of suffering begins
    since the very first day when I opened my eyes.
    I'm an unknown to this huge world of grief and joy,
    not familiar with plots and tricks to live the life.

    Carelessly resting in the lap of sleep,
    crawling with dreams of flying in the sky.
    I giggle, I cry without hiding my real face,
    I weave fate in hands, draw my own lines.

    While living between fantasies and lies,
    soon I got acquainted with sorrow and pain.
    Enthusiasm of change stuffed my bones but
    burden bent my spine, blames dried my veins.

    Then I entered in the ripening age of body,
    where I learnt falling in love with falling apart.
    I learnt hiding teary eyes beneath smiling faces,
    and leaving people, home like shooting stars.

    I welcome ageing with my open arms,
    I love my grey and wrinkles more than anyone.
    I do not wish anything except living till I stop breathing,
    I only aspire to inhale and die as a soulful human.

    But sometimes I lose faith in humanity,
    when I see people going hard on their own souls,
    after getting tired of things dragging them down.
    How can you hurt someone living inside your bones?




    -Ananya

  • tengoku 4w

    I think of giving up writing a million of times,
    but then realise that I'm still afraid of losing you.











    -Ananya