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  • teshi_langyan 7w

    याद

    ये जो मुस्कुराहट तेरी मेरे दिल को भाती है
    यादों में तू है या .....
    तेरे बीच मेरी यादें .....
    खेर जो भी हो ..... तू मुझे याद बहुत आती है।
    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 7w

    मेरे जाने के बाद

    सुनो .... बता भी दो .....
    याद किसे करोगे मेरे जाने के बाद .....
    ओर हाँ .... ये भी बताना ....
    कौन तुम्हें चाहेगा मेरी तरह .....मेरे जाने के बाद।
    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 11w

    नशा

    होता हूँ नशे में तो याद कर लेता हु दोस्तों को अक्सर
    वरना ये मेरा होश तो मुझे खुद से भी मिलने की इजाज़त नहीं देता

    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 14w

    संगीता

    हक़ तो मेरी उँगलीयों का भी बनता है तेरी इन ज़ुल्फ़ों पर
    फिर क्यू ये बस हवा में लहराती है
    संगीत सा शहद है तेरे नाम में संगीता की
    जब भी लेता हूँ जुबाँ मीठी हो जाती है
    मेरी क़ाबिलियत से बढ़ कर दिया है उसने मुझे
    जब तुझे देखता हूँ तो ये बात समझ में आती है
    हक़ तो मेरी उँगलीयों का भी बनता है तेरी इन ज़ुल्फ़ों पर
    फिर क्यू ये बस हवा में लहराती है

    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 14w

    अक्सर

    अक्सर तेरे हाथों को अपने हाथ में रखकर सोचता हूँ
    कितना खुशनसीब हूँ मैं की जो तू मुझे मिली

    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 15w

    एक अरसे बाद अकेले उसके शहर जाना हुआ मेरा
    वापसी में कुछ यादें साथ आयी कुछ बाते साथ आयी
    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 15w

    सुना है तेरे गालों ने गुजरी रात तुझसे शिकायत की
    कँहा है वो आजकल जो हमें प्यार से चूमा करता था।
    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 23w

    माचिस

    एक दोस्त यह बना लेता हूँ, कुछ जान पहचान वहाँ बना लेता हूँ
    उफ़्फ़ इस तन्हाई को मैं सजाऊँ कैसे
    भूल गया हूँ माचिस मेरी खुशीयों की, तेरी जेब में रख के
    अब तेरी इन कमबख़्त यादों को जलाऊँ कैसे।
    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 23w

    जानता हूँ

    जानता हूँ सब ये तुम्हारे ज़रूरी काम जो है
    कुछ जो तेरे ख़ास लोग ओर हाँ वो आम जो है
    बातों बातों में जो बात तू छुपाती है, वाह, तेरी अदा
    जानता हूँ ये तेरी किताबों में ढलती शाम जो है।

    ©teshi_langyan

  • teshi_langyan 23w

    तारीफ़

    आँखे आपकी ऐसी की इन आँखो से मेरी आँखे नहीं हटती
    देख घनी ज़ुल्फ़ें आपकी आजकल ये काली घटा नहीं उठती
    होते हो सामने तो तारीफ़ करती ये जुबाँ नहीं रूकती
    होते हो दूर तो लिखते लिखते कम्बख़्त क़लम नहीं थकती।


    ©teshi_langyan