thesurajsingh

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  • thesurajsingh 6h

    हरे भगवे के भीड़ में हम सफेद सुर्ख लगते हैं
    सारे हैं यहां बुद्धिजीवी हम महा मूर्ख लगते हैं

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 1d

    महसूस क्या होगी अब और ज़िन्दगी की परवाज़
    मैंने बन्द कमरे में सुनी है उसके सिसकियों की आवाज़

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 1d

    तेरी नाराजगी में अब वो असर नहीं होता
    तुम रूठती हो मैं मना लेता हूं अब डर नहीं होता

    आंखों से पट्टी दिमाग से गोबर निकाल दो
    जो सच्चा देशभक्त हो वो कट्टर नहीं होता

    जब जी आये मां बाप से बात कर लिया करो
    इस काम के लिए कोई शुभ पहर नहीं होता

    सत्ता के नुमाइंदों ने तुम्हें मुझसे अलग कर दिया
    वरना हे अनम तुम्हारा भी घर यहीं होता

    आसमां तकते ही गुज़रती है अब भी रात हमारी
    तुम्हारी सब्बा खैर का भी कोई असर नहीं होता

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 1d

    तुम घर तो क्या छत पर चढ़ जाओ
    झोपड़ी के ओसारे इतने नीचे होते हैं
    मैंने देखा है शहर के ऊंचे मकानों को
    उनके किनारे भी ऊंचे होते हैं

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 2d

    न कोई भगवा मरा होगा ना कोई हरा मरा होगा
    गोली चली है लहू बहा हैं फिर कोई इंसां मरा होगा

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 2d

    दोनों- गोपाल और शाहरुख
    दोनों- वारिस पठान और कपिल मिश्रा

  • thesurajsingh 2d

    नाम में गांधी लगाने से
    गांधी पे माला चढ़ाने से
    झूठी कसमें खाने से
    सरेआम गरियाने से
    तुम बड़े ना हो जाओगे
    सब सत्ता के लिए करते हो
    और कितना भरमाओगे
    तुम्हारी नियत सबको पता है
    दोगले हो दोगले ही रहोगे

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 2d

    हर रोज यहां कोई मर रहा है
    देश का कोना कोना उजड़ रहा है
    हो गर खून के शौकीन तो बताओ
    ये किसका खून बह रहा है
    © The Suraj Singh

  • thesurajsingh 3d

    दिल्ली तक तो आ गया
    तू कहे तो राजस्थान आ जाऊं
    तू अपनी अम्मी को मना तो सही
    मैं बारात लेकर पाकिस्तान आ जाऊं

    ©The Suraj Singh

  • thesurajsingh 3d

    किस्मत का खेल भी सूरज
    देखो कितना भयंकर हुआ
    पत्थर सड़क का कंकर था
    मंदिर पहुंचते ही शंकर हुआ

    ©The Suraj Singh