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तेरे नाम-हम पगलैट है जी

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    भाग:१९

    फ़र्श पर खून पसर गया।
    वहां! काँच टूटने की आवाज़ से उपाध्याय जी उठ गए और बोले कौन है? श्रीमती जी ने आँचल को कहा कि जल्दी कमरे में जाओ। आँचल तेजी से अपने उस मखमली चादर को संभालते हुए अपने कमरे की ओर बड़ी ही थी कि उपाध्याय जी कमरे से बाहर आ गए और सामने श्रीमती जी को देख अपने माथे पर हाथ मारा। बोले की "बेड़ा गर्द हो" अब तो रात को भी आराम नहीं। माँ-बेटी ने तो ठेका ले रखा है मेरी छाती पर बैठकर नृत्य करने का, यह कहते हुए वह अपने कमरे में चले गए पर उन्होंने आँचल को नही देखा। आँचल भी जैसे-तैसे अपने कमरे में पहुँच ही गयी।

    श्रीमती जी ने अपने सीने पर अपना हाथ रखा और kitchen की दीवार का टेका लेते हुए, अपने माथे पर से पसीने को पोछा और ऊपर छत की ओर देखते हुए बोली "हे रामजी बस इस बुरे समय से जल्द छुटकारा दिलाओ, अब बर्दाश्त ही नही होता, किसे समझाये और किसे संभाले"। यह कहते हुए उसकी आंख भर आयी पर फिर उसने झट से खुद को संभला और यह देखने के लिए खिड़की को ओर बढ़ी की आखिरकार इतनी रात को काँच टूटने की आवाज़ कहां से आयी (नारी की यही तो तो बात उन्हें पुरुषों से अलग करती है।)

    श्रीमती जी kitchen से सीधी रेखा में दरवाजे के बाई ओर की खिड़की की तरफ बड़ी और धीरे से पर्दे को हटाकर देखा तो कुछ समझ ही नही आया। ज्यादा अंधेरा होने के कारण कुछ साफ दिख नही रहा था पर अब कुत्तो के भौकने की आवाज़ उसे सुनाई देने लगी थी। उसने दुबारा कोशिश की तो उसने देखा कि सड़क से सटे फुटपाथ की streetlight टूटी हुयी है, वह समझ गयी कि यह road पर रहनेवालो लोगो का काम है। वह फिर अपने कमरे की ओर बड़ी सोने के लिए तो उसका मन फिर इस बात में उलझ गया कि आँचल रात को क्यूँ स्नान करने गयी थी? कही उसने हमसे झूठ तो नहीं कहा था ना? उसका मन नही माना तो वह दुबारा आँचल के कमरे की ओर बढ़ी और दरवाजे पर कान लगाकर आँचल की आवाज़ को सुनने की कोशिश करने लगी। उसे आभास हुआ कि आँचल इतनी रात किसी से बात कर रही है।

    जारी है...

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  • trickypost 4d

    भाग:१८

    काँच टूटने की आवाज़ आयी।
    यहां अमरिंदर आग बबूला हुए जा रहा था कि, बड़ी-बड़ी बातें करते है यह सब, आता जाता कुछ नही, हर बार बाहर से ही hacker बुलाना पड़ता है। इससे अच्छा तो हमारा ही system है, एक बार permission मिला तो दो डंडे पिछवाड़े मारते ही मरा भी जिंदा हो जाता है।

    कमरे से आवाज़ आ रही थी, माधवी रिया को समझाने की बहुत कोशिश कर रही थी पर वह मान नही रही थी, उसके रोने की आवाज़ से अमरिंदर और गुस्सा हो गया और जोर से बोला माधवी उस लड़की को ले आओ यहाँ, मैं समझाता हूँ। माधवी ने रिया को आग्रह किया और दोनों के desk पर आकर बैठ गए। थोड़े चिड़चिड़े अंदाज में अमरिंदर ने कहा आप घर जाओ, हमको जब कुछ पता चलेगा तो हम आपको बुला लेंगे। आपकी दोस्त ग़ायब, आपका भाई गायब आपके घर से। आपके घर मे कोई दिक़्क़त है हम कल आकर देखेंगे, ठीक, अभी आप जाओ, request करते है।

    उसकी इस तरह की हरकत देख रिया चौकी से बड़बड़ाती हुई बाहर आयी और उसने अपनी माँ (सावित्री भट्टाचार्य) को phone किया और रोते-रोते सारा प्रकरण बताया। सावित्री ने बड़े प्यार से रिया को कहा कि आप घर आ जाओ हम आते है। रिया ने online CAB hire कर वह घर की ओर निकल गयी।

    अमरिंदर अभी भी बड़े ही गुस्से में था, रजत की desk की ओर देखा तो रजत नही था, अमरिंदर उठकर दरवाजे के बाहर देखने गया कही वह बाहर तो नही, तभी आवाज़ आयी, "साब रकल तला गया" अमरिंदर ने देखा तो चायवाला तिताराम खड़ा था। उसे देखते ही एक हल्की सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गयी क्यूंकि चौकी में हरकोई उसे छेड़ता था क्यूंकि वह गे था और तोतला भी। तिताराम ने चाय पूछा तो अमरिंदर ने उसे गुदगुदी कर दी, जिसके कारण पानी का गिलास उससे छूट गया। अमरिंदर ने गुस्से से उसे देखा और बोला कान पकड़कर मेरे सामने उठक बैठक कर, सारा फ़र्श गीला कर दिया। तिताराम अमरिंदर के सामने आया और "चौरी साब" बोला ही था कि फर्श पर खून पसर गया।

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  • trickypost 5d

    भाग:१७

    अमरिंदर आग बबूला हो गया...
    वहां श्रीमती जी, यहां-वहां आँचल को ढूंढने लगी, उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। वह इस समय अगर उपाध्याय जी को यह बतायेगी तो वह उल्टा उनपर ही नाराज़ हो जायेंगे, श्रीमती जी भागते हुए सीढ़ियों के सहारे नीचे आयी और धीमी आवाज़ में आँचल को पुकारने लगी पर कोई जवाब ना मिला। उसने सोचा कि कही वह पानी पीने किचन तो नही गयी, उसे आदत है गर्म पानी पीने की, तो वह झट से किचन की ओर मुड़ी ही थी शॉवर की आवाज़ की तरफ उसका ध्यान गया। उसे यह बड़ा अटपटा लगा कि इतनी रात को वाशरूम में कौन हो सकता है तो जैसे ही वह मुड़ी उसने देखा कि एक सफ़ेद मखमली पतले से चादर में आँचल भीगे बालो को समेटते बाहर आ रही थी। उसका बदन पूरा भीगा होने के कारण वह मखमली सफ़ेद चादर उसके बदन से चिपक गया था कई जगह। वह गुस्से से आँचल की ओर बढ़ी और उसने आँचल को डांटने हुए कहा कि, बावरी हो गयी है क्या? यह सब क्या नाटक है इतनी रात को, तू भी शर्म बेचकर खा गयी है क्या? घर है इसका मतलब यह नहीं कि ऐसे चुड़ैलों की तरह नंगे हो कर टहलने लगोगे। श्रीमती जी उसे खरी-खोटी सुनाए जा रही था, जो मन मे गुस्सा था वह उसने देर तक आँचल पर शब्दो के बाण चलाकर उतारती रही। फिर अचानक से वह रुकी और आँचल के बाल पकड़ते हुए उसने पूछा मैं इतनी देर से बक-बक किए जा रही हूँ और तू जवाब क्यूँ नहीं दे रही।

    आँचल ने हल्की सी मुस्कान लिए होंठो पर कहा कि माँ, आप भी ना, कभी-कभी पापा जैसे बन जाते हो, मेरे सर में दर्द था तो हम जाकर नहा लिए, आप बे-मतलब ही हमें डांट रहे हो। उसने बात इतनी सहजता से कहा कि श्रीमती जी का सारा गुस्सा एक क्षण में ही नदारत हो गया। उसने आँचल को गले लगाया और बोला बेटा, तू तो हमें कही छोड़कर नहीं जाएगी ना? तू तो हमारी सबसे प्यारी बेटी है ना, तू कभी भी ऐसा नही करेगी ना? आँचल ने एक हाथ से उस मखमली चादर को संभला और दूसरे हाथ से माँ के गालो को सहलाते हुए कहा कि, मैं कभी भी ऐसा नहीं करूँगी बल्कि...
    जोर से काँच टूटने की आवाज़ आयी।

    जारी है...

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  • trickypost 5d

    भाग:१६

    तभी फ़ोन बजा..
    अमरिंदर ने झट से रजत को आवाज़ दी तो रजत ने के-अय्यंगार को फ़ोन मिलाया। के-अय्यंगार ने उन्हें phone को receive करने के लिए कहा और अपने सहयोगी को ट्रेसिंग mode को चालू करने को कहा। अमरिंदर ने instruction सुनते ही फ़ोन receive किया, इस बार वह थोड़ा तैयार था पर इस बार कोई शोर ना हुआ और एक प्यारी सी आवाज़ आयी। मैं सावरी आपको दिल से धन्यवाद कहना चाहती हूँ, आप बहुँत ही प्यारे इंसान है, क्या आप हमसें रोज़ मिलना चाहेंगे, हम आपकी हर जरूरतों का ख्याल रखेंगे, बस आप भी हमारा कहना मानना। आप समझ रहे है ना? बोलो ना, आप कुछ कहते क्यूँ नहीं मेरे राजा।

    के-अय्यंगार ने खुद ही system को ध्यान से देखने लगा कि हो क्या रहा है, जैसे ही अमरिंदर ने कॉल उठाया किस PSTN (एक माध्यम जिसके द्वारा एक शहर या देश का में किए गया कॉल की जानकारी validate होने बाद कॉल कनेक्ट होता है) के द्वारा उसका HLR और VLR हुआ था यह उन्हें पता चल गया। अब के-अय्यंगार को बस इतना इंतेज़ार था कि उसका लोकेशन का IP address मिल जाए, वह इसी ताक में था और screen पर IP address pop-up हुआ वह जबतक उस आंद्रेस को copy करता वह change हो गया। वाग तो मानो भौचक्का रहा गया यह देखकर की एक सेकंड से कम समय मे ही IP address बदल रहे थे, इस तरह की technology तो Terrorist इस्तेमाल करते है, वह इन सब के लिए तैयार नही था, जबतक वह कुछ मदद लेता अपने साथियों की तब तक कॉल disconnect हो गया और आखिर में जो IP address मिला उन्हें, के-अय्यंगार ने उसका details निकलना जरूरी नही समझा क्यूंकि उसे पता था कि कुछ होनेवाला ही नही।

    अमरिंदर अपनी desk से उठकर रजत के desk पर गया और वह रिसीवर अपने हाथ मे लेकर उसने के-अय्यंगार से पूछा। तो पता चला कि वह कौन था या थी, निराश आवाज़ में जवाब आया कि नहीं, हमने सोचा था कि यह कोई छोटा froud कॉल होगा तो हमने ज्यादा prepartion नही की थी तो हम उसका location identify नहीं कर पाये। यह सुनते ही अमरिंदर आग बबूला हो गया

    जारी है...

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  • trickypost 5d

    भाग:१५

    रिया रोते हुए चौकी के अंदर आयी।
    अमरिंदर ने रिया की तरफ देखते हुए पानी का गिलास आगे बढ़ाया और पानी पीने का आग्रह किया। रिया तो बस रोये जा रही थी तभी एक ladies कॉन्स्टेबल मालती जाधव आयी और उसने बड़े ही प्यार से उसे शांत होने को कहा। कुछ देर में रिया थोड़ी शांत हुयी पर वह अब भी रो रही थी। एक बार फिर अमरिंदर ने पूछा कि क्या हुआ रिया।

    रिया ने रोते-रोते कहा कि कल से अमर भैय्या घर नही आए और अब तो उनका फ़ोन भी नही लग रहा है। यह सुनते ही अमरिंदर के चहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गयी उसने नज़रे घुमाई तो रजत भी मुस्कुरा रहा था। अमरिंदर ने रिया को बोला कि आप आराम से बताओ कि क्या हुआ और उसने इशारे रे रजत को बुलाया।

    रिया ने कहा कि कल शाम को हम MIDC से घर पहुँचे तो मैं बड़ी थकी हुई थी तो सोने चली गयी। रात को लगभग २:५० को मेरी नींद खुली तो मैं पानी पीने kitchen की तरफ जा रही थी तो देखा कि भैय्या का कमरे में नहीं है। मुझे लगा शायद वह दूसरे घर चले गए होंगे पर उन्हें बताना चाहिए था, यो घर की खिड़की से बाहर देखा तो भैय्या की bike वही खड़ी थी। यह बड़ा अटपटा लगा हमे क्यूंकि भैय्या कभी भी bike के बिना कही नही जाते, तो मैंने भैय्या को फ़ोन लगाया तो उनका नंबर रिंग हो रहा था पर उन्होंने phone काट दिया। तो मैंने उन्हें message भेजा और इंतेज़ार करते-करते सो गयी। सुबह जब आँख खुली तो देखा कि उनका कोई message नही आया है तो मैंने दुबारा उन्हें कॉल किया तो, उनका phone switched off बता रहा है। मैं दूसरे घर भी गयी तो पता चला कि वह यहां आये ही नहीं। मैजे उनके सभी दोस्तों से पता करने की कोशिश की पर कुछ पता नही लग रहा है। मुझे डर लग रहा है, यह कहते ही वह फिर जोर-जोर से रो पड़ी।

    माधवी ने सांत्वना दी और उसे दूसरे कमरे में ले गयी जहां और समझाने लगी। रजत अमरिंदर को देखकर हँसा और बोला, यह तो पक्का दोनो का लफड़ा लगता है। पर सर इसमे हम कुछ कर भी नही सकते ना, अमरिंदर ने कहा तृप्ति अभी भी नाबालिक है, अगर अमर को पकड़ ले तो अच्छा खासा मिलेगा हम लोगो को, तभी phone बजा।

    जारी है...

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  • trickypost 5d

    भाग:१४

    वह कमरे में नहीं है..
    यहां Cyber cell ने instruction के आधार पर उस नंबर का CDR-Call details record निकाला तो पाया कि वह calling card है और उससे सिर्फ दो ही कॉल किए गए है, दोनो ही call अमरिंदर को किया गया है, पर वह IVR-Intractive Voice Response कैसे हो सकता है यह उन्हें भी समझ नही आ रहा था। उन्होंने उस नंबर की और जानकारी इकट्ठा करने के लिए blue pumpking (call ट्रेसिंग सॉफ्टवेयर) का इस्तेमाल किया तो पाया कि दोनो ही समय उस number का location दो अलग country में दिखा रहा था, तो वह झट से भाँप गये की यह VOIP-Voice over Internet Protocol कॉल था जो कि computer से किया गया है और दोनों ही बार उसका IP address अलग है। मतलब साफ था कि यह एक froud call या किसी जानकर व्यक्ति ने किसी फायदे के लिए गलत तरीको का इस्तेमाल किया है। cyber cell के अधिकारी जिनका नाम के-अय्यंगार है उन्होंने रजत को phone किया और सारी जानकारी को उन्हें कम शब्दों में बताया और कहा कि लिखित जानकारी आपको भेज दी गयी है, कल तक पूरी जानकारी उनको मिल जाएगी। के-अय्यंगार ने कहा कि अमरिंदर से बात करा दीजिये कुछ और पहलू पर बात करनी है, रजत ने फ़ोन मेज पर रखा और अमरिंदर के desk की ओर बढ़ गया।
    रजत ने कहा की सर cyber cell से फ़ोन है आपके लिए, अमरिंदर ने अपनी कुर्शी को पीछे की तरफ धकेला और उठकर खड़ा हुआ, रजक की desk पर से उसने फ़ोन उठाया तो, के-अय्यंगार ने कहां जय हिंद सर, जवाब में अमरिंदर ने भी जय हिंद कहा। के-अय्यंगार ने कहा कि सर कल आपको सारी रिपोर्ट मिल जाएगी पर उससे कुछ फायदा नही होगा। हमने आपको यह बताने के लिए कॉल किया कि हमने उस नंबर को ट्रेस करने के लिए जरूरी permission ले ली है, अगली बार जब भी आपको कॉल आये, आप हमें बता दीजिएगा, हम उसे ट्रेस कर लेंगे, आपको ज्यादा से ज्यादा समय कॉल को चालू रखना होगा। आगे अगर कुछ और जानकारी मिलती है तो हम आपको बताएंगे, जय हिंद सर, और फ़ोन काट दिया।

    अमरिंदर निराश होकर अपनी डेस्क पर आया और कुर्शी पर बैठा ही था कि, रिया रोते हुए चौकी के अंदर आयी।

    जारी है...

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    भाग:१३
    Phone ring हुआ...

    अमरिंदर ने देखा कि फिर सावरी नाम से ही call आया है, इस बार उसने number को ध्यान से देखा तो वह यह समझ गया कि यह calling card का नंबर है जिसे विदेशों में प्रवासी इस्तेमाल करते है, वह सिर्फ 5 digit का number था, उन्होंने phone नही उठाया क्यूंकि उन्हें वह बकवास सी आवाज़ नही सुननी थी। रजत सागर को देखते हुए उन्होंने कहा कि cyber cell को इस नंबर की details निकालने के लिए भेजो, पता तो चले कौन परेशान कर रहा है और यह सावरी क्या बकवास सा नाम है, है वह कौन? रजत ने जेब के बाई तरफ से छोटी सी एक diary निकली और उसपर नंबर लिख लिया और वह अपनी desk पर जाकर काम मे लग गया।

    वहां! उपाध्याय जी ने रोज की तरह पूजा-पाठ किया और बिना खाये ही सोने के लिए चले गए, श्रीमती जी कुछ देर तक सर पर हाथ रखे बैठी रही और फिर वह भी उठकर अपने कमरे में चली गयी। आँचल पढ़ाई में व्यस्थ थी अपने कमरे में, उसे कल का assignment पूरा करना था। तक़रीबन रात के ३:१५ मिनट हुए थे, श्रीमती जी को नींद आ नहीं रही थी तो वह उठकर बैठ गयी और कुछ देर के बाद उनका मन किया किआ आँचल के पास जाकर सो जाते है। वह कमरे से बाहर निकली और सीढ़ियों के सहारे वह आँचल के दरवाजे तक ही पहुँची थी कि, उपाध्याय जु की कराहने की आवाज़ सुनकर वाग दौड़ी-दौड़ी नीचे कमरे में आयी तो, उन्होंने देखा कि वह सपने में बड़बड़ा रहे है कि "मुझे छोड़ दो, मैंने क्या किया है? जाने दो" श्रीमती जी ने धीरे से उन्हें धक्का देते हुए उठाने का प्रयास किया तो वह जाग गए। उन्होंने पूछा क्या हुआ, उपाध्याय जी जवाब देने की जगह श्रीमती जी को गुस्से से देखा और बोले कि माता का जगराता कर रहे हो क्या? सो जाओ इतनी रात को कोई आनेवाला नही है, इतना कहकर वह सो गए।

    श्रीमती जी की आँख भर आयी, वह झट से उठी और तेजी से आँचल के कमरे की ओर बढ़ी, दरवाज़ा खोला और सीधा पलंग पर जाकर बड़बड़ाने लगी। किसी को मेरी कदर ही नहीं है, मेरी feelings को कोई समझता ही नही, वह यह कह ही रही थी कि उसे आभास हुआ कि पलंग पर आँचल के अंगवस्त्र पड़े है और वह कमरे में नहीं है।

    जारी है...

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    भाग:१२

    कवर पर लिखा था सावरी
    उसे जब उन्होंने खोला तो उन्हें बड़ा अजीब सा लगा, उसमे ढेरो सारे dots और line थे (First page) -.-- --- ..-  -.- -. --- .--  .... --- .--  -- ..- -.-. ....  ..  .-- .- -. -  - ---  .-..  .-.. --- ...- .  - ---  .-.. .. ...- .  .-- .. - ....  -.-- --- ..- वह पता नहीं क्या था तो उन्होंने श्रीमती जी से पूछा कि इसका मतलब पता है, उन्होंने एकटक निगाहों से देखा और कहा कोई assignment होगा उसका, शायद.. उपाध्याय जी ने Book के पन्ने सब पलटे तो देखा की पूरी Book में उसी प्रकार के lines और dots थे, तो वह चिड़ गये और Book को फेकते हुए बकने लगे, आजकल के बच्चों का तो कुछ समझ ही नही आता। पढ़ाई करने जाते है या मटरगश्ती, कुछ भी नहीं समझ रहा, परिवार का नाम मिट्टी में मिला दिया। मुझे तो पक्का लग रहा है कि जैसी उसकी हरकते थी वह पक्का किसी के साथ भाग गयी।

    वहां अमरिंदर ने रजत सागर को अपना phone देते हुए कहा कि इसे ठीक कराकर जल्दी ले आना, दूसरे बहुत से काम पड़े है, इस लड़की के चक्कर मे बिना वजह ही अपना समय बर्बाद हो गया। आजकल की लड़कियों को प्रेम का भूत सवार रहता है, वह बिना बताए ही भाग जाती है और घरवालों को लगता है कि उनके साथ कुछ हुआ है। एक दूसरे constable संजीव नागर की तरफ देखते हुए उन्होंने पूछा, तुझे क्या लगता है? यह तृप्ति का क्या माजरा है। संजीव मुस्कुराते हुए कहता है कि, पूछताछ से तो यही लगता है कि बड़ी चालू लड़की है, मुझे भी लग रहा है कि किसी के साथ रफूचक्कर ही हो गयी होगा। बाप इतना सीधा और बेटी तो नवाब की औलाद वाली जिंदगी जीने लगी थी, उसके पास इन सब के लिए पैसे कहा से आते होंगे, पक्का कोई ना कोई तो चक्कर होगा ही उसका, यह कहकर सब हँसने लगे। अमरिंदर ने हँसते हुए कहा कि फिर एक मुर्गा पकड़ो जिसे उससे प्यार हो और उसकव गवाह बनाकर केस को रफा-दफा करते है नही तो हमारी रोज की कमाई बंद हो जाएगी।।

    सब अपने-अपने काम मे व्यस्थ हो गए और तक़रीबन २ घंटे बाद रजत सागर चौकी आया और phone को अमरिंदर को देते हुए कहा कि सर ठीक हो गया phone। अमरिंदर ने पूछा कि क्या हुआ था, उस call की वजह से कोई virus आ गया था, रजत ने हकलाते हुए बड़ी धीमी आवाज़ में कहा कि, आप जो online देखते है ना रात को, गलती से आपने कोई pop up on कर दिया था तो उसकी वजह से आपका phone dead हो गया, आगे कुछ कहने को ही था कि phone Ring हुआ

    जारी है

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    भाग:११

    तो नाम लिखा आ रहा था सावरी,

    अमरिंदर ने फोन उठाया और hello ही कहा था कि एक अजीब सी आवाज़ से उनके कान में दर्द होने लगा, उन्हें बड़ा गुस्सा आया कि फ़ोन काट दु पर उन्होंने दुबारा फ़ोन को कान ओर लगाया तो उनका गुस्सा और बढ़ गया। एक recorded voice थी लडक़ी की, "आप सावरी के राडार पर है कोई भी हथकंडा इस्तेमाल करने से पहले या किसी प्रकार की जानकारी मिलने के बाद उसे media को देने से पहले यह याद कर लेना कि, ३१२/६ निर्झरा, देवकी, वर्धा में कोई आपका इंतेज़ार कर रहा है" इतने के बाद एक हँसने की आवाज़ आती है और फ़ोन अमरिंदर का डेड हो जाता है। उसे यह बड़ा ही अटपटा लगा पर वह फ़ोन को चालू करने की कोशिश करता है पर फ़ोन ऑन नही होता। उनके mobile स्क्रीन पर लिखा आता है कि सावरी इस watching you, यह देख अमरिंदर को यह एहसास हो जाता है कि किसी ने उनके फ़ोन में किसी तरह का virus भेज दिया है। अमरिंदर सोच में पड़ जाता है कि कोई कॉल से virus कैसे आ सकता है वाग यह सोचता ही रहता है कि चौकी के मुखाने पर गाड़ी रुकती है और कांस्टेबल रजत सागर आवाज़ देता है कि, सर हम पहुँच गये।

    वहां! उपाध्याय जी अपने घर पहुँचते है और श्रीमती जी को तृप्ति की सारी बुक्स और उससे जुड़े सामान को लाने को कहते है। श्रीमती जी ऊपर के कमरे में जाकर जो भी मिलता है उसे उठा लाती है और देते हुए उपाध्याय जी कहती है कि इसका करना क्या है। उपाध्याय जी कुछ बोलने के मूड़ में नहीं थे वह बस सभी पुस्तकों को ध्यान से देखने मे व्यस्थ हो जाते है। हर एक पन्ने को पलटते है और गौर से देखने के बाद दूसरे पन्ने को भी। ऐसा करते हुए तक़रीबन ४ घंटे हो गये थीं एक पुस्तक की कवर पर लिखा था सावरी।

    जारी है....

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    भाग:१०

    फोन आया....
    अमरिंदर ने फ़ोन उठाया तो, कॉन्स्टेबल रजत सागर ने कहा की सर यहां के सभी watchman से पूछ लिया हमने किसी ने कल रात को किसी लड़की को यहां से गुजरते नही देखा और ना ही किसी ने किसी प्रकार की कोई घटना देखी। अमरिंदर को पहले से पता था कि पूछताछ से कुछ हासिल नही होगा, सुराग ही ढूंढना होगा। रात को ज्यादातर वॉचमैन तो सोते है और वह कुछ देखेंगे भी तो भी वह इस झमेले में नही पड़ेंगे। अमरिंदर ने रजत से कहा कि तुम CCTV recording लेकर आओ, चौकी में investigation टीम को देंगे, वह identify करेंगे।

    वहां उपाध्यायजी के घर पर चहल-पहल बहुत बढ़ गयी। सब सांत्वना देने लगे श्रीमती जी को, कोई बात नहीं आप धैर्य रखिये तृप्ति बड़ी समझदार बच्ची है उसे कुछ नही होगा, पुलिस उसे ढूंढ ही लेगी। आँचल तो सदमे में थी, उसे समझ नही आ रहा था कि माँ को संभाले या खुद को। कमजोरी के कारण अब उसे चक्कर आने लगे थे, यह देख श्रीमती जी ने खुद को संभाला और आँचल को प्यार से गले लगाकर बैठ गयी, वह बोली कि बेटा है तू मेरा, कुछ नही होगा। हम सब साथ है ना तबतक कोई हमे नही तोड़ सकता।

    यहां! अमरिंदर ने उपाध्याय जी और उनके सहयोगियों को घर जाने के लिए कहा और अपनी team के साथ वह चौकी के लिए निकल पड़े। उनके मोबाइल की घंटी बजी, कोई unknown number था पर चूंकि उन्होंने true caller app डाला था तो नाम लिखा आ रहा था सावरी।

    जारी है....

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