v_a_run_krs

Tomorrow is uncertain no one knows what will it bring instagram:rumplekrd

Grid View
List View
Reposts
  • v_a_run_krs 1w

    Look for the daffodils
    _________________________

    It will hurt
    It will always hurt
    It will be hard to breathe
    You will be lost and alone
    You will have your autumns
    Rains will follow

    Look for the Daffodils
    in the thunderous nights

    Leaves will rustle when you need calm
    And the silent nights will howl down upon you
    Tenor and soprano

    But the bed would blossom with Daffodils
    The stars will shine brighter
    Only for you
    And in the starlight
    Look for the Daffodils

    They will Glitter to tell you
    What you seek is within..

    Look for the Daffodils
    And when you find them
    Watch the buds bloom
    Don't pluck them and stuff up your pockets
    Let them be
    For, they are the ones which have been the witness of your merry days

    For, You will need them
    When the water turns grey
    And the night grows Cold again.

    Look for the Daffodils
    And you will find them looking for you too..
    ©v_a_run_krs

    Read More

    Daffodils represent Hope,
    The most important thing we need to have when the time gets rough(Please Read the Caption)

    ©v_a_run_krs

  • v_a_run_krs 1w

    Forgetting is like ice skating
    When you don't know ice skating.

    ©v_a_run_krs

  • v_a_run_krs 1w

    And our hearts are snowflakes,
    Falling into oceans,
    Disappearing...

  • v_a_run_krs 2w

    खुद से ही खुद का बचपन दूर करने वाले 'हम'
    चाहते हैं कि हमारा बचपन वापस लौट आए
    ©v_a_run_krs

  • v_a_run_krs 2w

    A new New Year.
    Some new resolutions.
    The same old me.


    It's surely going to be tough.
    And tough is what I am asking for.


    May Strength, Passion and optimism be my pals.
    ©v_a_run_krs

  • v_a_run_krs 3w

    घनघोर घनेरे बादल में
    मैले जीवन के आंचल में
    मैं धूप छुपाए बैठा हूँ

    आशाओं के सुंदर मोती
    सीपी में सजाए बैठा हूँ

    प्रत्याशाओं के जीवन में
    अंगार भरे इस आंगन में
    नूतन दिन का, नव जीवन का
    मैं दीप जलाए बैठा हूँ

    आशाओं के सुंदर मोती
    सीपी में सजाए बैठा हूँ

    कुछ कुंठा और निराशा में
    नव पल्लव की अभिलाषा में
    टूटे स्वपनों के हिस्सों को
    मुट्ठी में दबाए बैठा हूँ

    आशाओं के सुंदर मोती
    सीपी में सजाए बैठा हूँ

    ©v_a_run_krs

  • v_a_run_krs 3w

    I recently came through a post here,
    It was a question actually which was-
    Does Age(difference)matter in love?
    Now, I know everyone can have their own opinion about this but here is how I view it. :

    1.I don't want to be judgemental but if you are 13,14,15 or 16, chances are you don't even know what love means.This is the age when you practically fall for anyone who smiles at you. The struggle is real.

    2.Age doesn't matter unless you are in love(in THAT way)with a child because then you will be a pedophile.

    3.If you already are in love with someone who you consider to be beyond your perimeter of age preference(hence the question),It's clear age doesn't matter to you,which gives birth to a new question- who are you asking this question for?
    Does age difference between you and your love matter to your family,the neighbour,your landlord,the milkman,the bus driver,the society?
    HELL YES
    They will in no time build up a preconception about you.

    3.Age difference doesn't matter in love,unless it's one of your fetishes and not love.(Some Guys I tell you)

    4. Age difference doesn't matter if you understand the other person is on a different level of maturity and you guys keep a balance.

    5.Your neighbour would adore Nick and Priyanka or even Shahid and Meera as a couple but would not delay in commenting- शर्माजी की बहू उनके बेटे से तीन साल बड़ी है।
    So before dealing with the societal norms, make sure it's love your are fighting for.

    People can find love at any age.

    'WE' are the society.

    Let's not bring Moral Policing in every Picture.



    So..Another question- How do you know if it's love?
    ©v_a_run_krs

  • v_a_run_krs 3w

    ����������������������������������

    Read More

    कभी पीछे भी मुड़ कर देखना चाहिये,
    देखना चाहिये, ढूंढना चाहिये
    आज के प्रतिबिम्ब में स्वयं का बिम्ब

    कभी कल में भी जीना चाहिये
    हर खास परछाई को पीना चाहिये
    कभी सोचो, कितना मज़ा आता था ना
    पहले जब छोटे थे।
    न कोई बोझ न कोई चिंता

    सब बैठ कर खेल खेला करते थे।
    खुश होते, रोते, चिल्लाते,संयम नाम की चीज़ नही थी,
    पर फिर भी खुश थे।
    चित्त प्रसन्न रहा करता था।

    अब जब वह आज कल में विलीन हो गया है,
    तो लीन हो गईं हैं उसके साथ आकांक्षाए सारी!

    चाँद को छूना, रात में भूत-भूत खेलना,
    पैदल भोर भए सैर पर जाना अपनी छोटी सी चप्पल पहन।
    सब लीन हो गए हैं
    न जाने कहाँ खो गए हैं।
    दूसरों से क्या खुद से भी काफ़ी दूर निकल आए हैं,
    भूल गए हैं अपना स्वयं,
    हम क्या थे,कैसे थे।
    काश लौट आए फिर
    वो दिन बेपरवाही के,अक्खड़पन के
    दिन भर खेल के
    माँ की डांट के
    दोपहर की प्यारी धूप के
    नम आँखों पर साफ दिल के
    काश!
    ©v_a_run_krs

  • v_a_run_krs 4w

    Dear Dad��

    Read More

    आना होगा कभी तुम्हारा
    उन यादों को तुम मत लाना
    जो लेकर गए थे,समेटे अपनी
    बंद आंखों में।

    हाँ, मत लाना उन्हें,
    यहाँ हम उनमें ही जीते हैं
    हर रोज़ उन यादों का ही घूँट पीते हैं

    यादें धुंधली पड़ गई होंगी तुम्हारी,
    हमसे उधार ले लेना,
    पर चुका देना सब वापस
    वापस जाने से पहले।

    इंतज़ार नहीं है,ऐतबार है
    भूल चुके होगे उन यादों को,
    तो आना होगा कभी तुम्हारा
    उन यादों को तुम मत लाना।
    ©v_a_run_krs

  • v_a_run_krs 5w

    रधिया
    सावन के थे बदरा छाए
    बीती रात के सपने लाए
    झूले पर जो पेंग मार रही,थी ब्राम्हण की वो गुड़िया
    तन पर प्यारे वस्त्र सजा कर, गले में कुंदन माल लिए
    दीख रहा था भोला बचपन,मानो सोलह श्रृंगार किए।
    -
    मैं भी झूलूंगी दीदी,
    झूलूंगी मैं इस पेड़ तले
    हाथ बढाओ लेलो मुझको,
    मुझको एकाकी न खले
    -
    मैं ना झूलने दूंगी तुझे,
    तू छोटे कुल की है बिटिया
    झूला मेरा गिर जाएगा
    जो तेरा इस पर पांव पड़ा
    -
    हुई अचंभित सी रधिया बोली मेरा इतना तो भार न है
    ले लो मुझसे मेरी चूड़ी बाकी आपके जैसा हार न है।
    -
    तू मुझ जैसी तो लगती है पर
    मुझ जैसी न दिखती है
    तेरे मैले कुचले कपड़े
    तू काली कालिख दिखती है।
    -
    अम्मा का सिला पीला लहँगा जो पहन के
    मैं आ जाऊं तो;
    दीदी क्या मुझे झुलाओगी?
    दीदी क्या पास बिठाओगी?
    -
    तेरे भी आंगन में रधिया
    है बबूल का इक पेड़ खड़ा
    कह कर बापू से तू अपने
    उसपर छोटा झूला पड़वा
    -
    थे छलक रहे अश्रु से नैन
    उस कोमल किंचित काया के
    बोली,दीदी यही भला है
    मैं डालूंगी खुद ही झूला
    होगा वो इससे बहुत भला
    -
    भागी तब रधिया अपने घर को
    मन में भारी सा भार लिए
    नैनों में मोती हार लिए
    पीड़ित मन की चीत्कार लिए
    -
    वह चली गई उस कोठर में
    था रस्सों का अंबार पड़ा
    उस कोमल प्यारी बाला का
    उसमें था काला काल छिपा
    दुख और हर्ष की धारा में
    निश्चित वह उसको नहीं दिखा
    -
    नाग काल के साए से तब
    डसी गई थी रधिया
    अहो विधाता वह पीड़ित थी
    क्यों डसी गई थी तब रधिया
    -
    अम्मा का फैला आँचल था
    बहना का फैला काजल था
    थे बापू के सपने अस्त व्यस्त
    रधिया की पेंगे हुई नष्ट
    -
    जाना जब ब्राम्हण की गुड़िया ने था
    रधिया का जाना
    सोचा,अच्छा होता रधिया को पास बिठाना
    -
    सावन भी मानो रो रो कर
    सब अश्रुवेग बहाता था
    उस निर्मल पावन बचपन का
    पर बचपन लौट न आता था।

    Read More

    रधिया

    सावन भी मानो रो रो कर सब अश्रुवेग बहाता था
    उस निर्मल पावन बचपन का पर बचपन लौट न आता था
    ©v_a_run_krs