vision_creation_of_rsp

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I'm a merry yarn and a fellow-rover . Live with me, sing with me or leave me.

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  • vision_creation_of_rsp 12h

    माँ

    सुनो हज़रात माँ भी जानती है
    अनकही नग़्मात माँ भी जानती है

    पहली बार इतने समय तक दूर हैं
    शायद ये बात माँ भी जानती है

    कह तो नहीं पाती वो अब हमसे
    लेकिन जज़्बात माँ भी जानती है

    किस तरह इधर-उधर के दिन कटे
    और काली रात माँ भी जानती है

    मैं जो किताबों में पढ़ता फिरता हूँ
    वो नफ़्सियात माँ भी जानती है

    मैं जो बंद ज़बाँ में लिए घूमता हूँ
    वो ख़्वाहिशात माँ भी जानती है

    वो जो तोड़ गये बिन मौसम में हमें
    वो सभी बरसात माँ भी जानती है

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 1d

    तुम्हें देख नीले आसमां कि रौनक याद आती है
    पंक्षियों के कलरव में चूड़ियों की खनक याद आती है

    पीले घूँघट में नैनों व लबों की शोखियों के साथ-साथ
    हरेक शब में लिखी नज़्म बे-धड़क याद आती है

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 2d

    ग़ज़ल

    बहोत करीब आकर चले जाते हैं
    मेरा झूठा हाल जानकर चले जाते हैं

    ज़बान खोलूँ भी किसके सामने आज
    सभी तो हाल पे वाह कर चले जाते हैं

    तबीयत बहोत मशक्कत से ठीक हुई
    फिर वो दिल को जगाकर चले जाते हैं

    इतनी नादानियाँ भी तो ठीक नहीं यार
    कि जब मिलो मुस्कुराकर चले जाते हैं

    इश्क़ का खेल अच्छा चल रहा हमारा
    नहीं चला तो वो बहलाकर चले जाते हैं

    कहते हैं बिन अश्कों के आँखें नहीं
    इसलिए भी यार रुलाकर चले जाते हैं

    जब दिल भर जाता है न पत्थरों से तो
    लोग मिले दिल ठुकराकर चले जाते हैं

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 2d

    ग़ज़ल

    और बाकी नहीं अलगाई के बाद
    बस याद बाकी है जुदाई के बाद

    नादाँ दिल को अब भी है मतलब
    सालो बाद जब मिले लड़ाई के बाद

    इश्क़ में सबकुछ लुटा बैठे एक वक्त
    फिर भी वहीं गये जग-हँसाई के बाद

    मुहब्बत में सब वाजिब लगा दिल को
    जब मेरा यार आया रौशनाई के बाद

    सब मुझे अपना कहने लगे उस वक्त
    जब मैं दिखने लगा घुँधलाई के बाद

    शबे ग़मों को अश'आर में पिरोये,फिर
    ख़ुदी में मशग़ूल ग़ज़ल-सराई के बाद

    दिल बहोत रोया उन दिनों ख़ामोशी में
    अब याद करके रोता है रिहाई के बाद

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 3d

    हम ये जो समझते थे कि सभी अपने हैं
    ख़ैर रोशन अब तो ये भी भरम टूट गया

    जिस के सहारे हम दरख़्त पर चढ़ते थे
    एक हवा के झोकें से वो भी छूट गया

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 4d

    ग़ज़ल

    अब की बार कोई स्टेशन तक छोड़ने नहीं आया था
    अब की बार हमारे बारे में कोई पूछने नहीं आया था

    हमलोग बहोत दूर हो गये थे, दिलो दिमाग से यार
    इसलिए भी तो कोई अलविदा कहने नहीं आया था

    आँखें तो निहारती रहती थी उन राहों को बेबसी से
    लेकिन जब अश्क बहें तो कोई पोछने नहीं आया था

    बहोत करीब आकर ग़ैर की ख़ुशबू मिली थी हमें
    इसलिए भी वो अपना राह में रोकने नहीं आया था

    इस बार नज़दीकियों में मुहब्बत के फ़ासले देखे थे
    कैसी मुहब्बत ,वो तो गले मिलने नहीं आया था

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 5d

    सबकुछ भूलाने के लिए हँसना पड़ता है
    दूसरों को हँसाने के लिए हँसना पड़ता है

    ख़ैर हँसने से जख़्म तो मिट नहीं जाते
    सो ग़म छुपाने के लिए हँसना पड़ता है

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 5d

    ग़ज़ल

    इतने करीब थे हमलोग कि दूर हो गये
    इस तरह ग़ैर कहने को मजबूर हो गये

    पहले हम सबके लिए अच्छे होते थे
    अब तो हमारे अनगिनत क़ुसूर हो गये

    इतनी आश्नाई की दिल भर जाता था
    और अब तो हम ही फ़ुतूर हो गये

    मेरी शिकायतें सभी से करते फिरते हैं
    या'नी अपने ही दुश्मन ज़रूर हो गये

    जितनी दुआएं थी सब वापस आ गईं
    और बचे हुए जख़्म भी नासूर हो गये

    बस ज़रा सी शोहरत की बात है उनमें
    इसलिए ख़ुद में वो मग़रूर हो गये

    इतना गिराते हैं वो हमें रोजाना कि
    रोशन ख़ुशियों से हम भरपूर हो गये

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 1w

    ग़ज़ल

    कौन पूछता है जुदाई के बाद
    दरख़्त गिर जाते पुरवाई के बाद

    अबके ज़माने में कोई नहीं आता
    सब यही कहते हैं भलाई के बाद

    क्या बचा है कहने को अब भी
    अब न कहेंगे आज़माई के बाद

    बस वक्त की ही बात है याँ सहर
    फिर शब आयेंगे रौशनाई के बाद

    फिर से हम उसी डगर को जायेंगे
    अलग ही मज़ा है आश्नाई के बाद

    एक शब सकूँ भी मिलता सबको
    इंतजार कर ज़रा इंतिहाई के बाद

    वक्त भी ठहरता है वक्त के लिए
    तब आती है सुब्ह धुँदलाई के बाद

    ©vision_creation_of_rsp

  • vision_creation_of_rsp 1w

    ग़ज़ल

    क्या-क्या नहीं कहते
    ख़ुदा से तो वो डरते

    हम पूछते भी उनसे हैं
    जो हामी नहीं भरते

    काम तो आते हैं मगर
    नाम मेरा नहीं करते

    बातें बस इश्क़ की है
    बेवफ़ाई से नहीं डरते

    छत एक हो बारिश में
    तो भाई से नहीं लड़ते

    ज़बान भी खोलो न
    ख़ामोशी से क्यूं खेलते

    एक धागें में पिरोये हो
    सो ज़ुदा नहीं रहते

    ©vision_creation_of_rsp