zindagiin2lines

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  • zindagiin2lines 5d

    मिनट भर और दौलत की फाँक
    वो चले गए
    कर रिश्तों की तिजारत
    वो चले गए
    महकमें भर रोशनी
    बयाँ कर शायराना अंदाज
    वो चले गए
    तपिश गहन सन्नाटों का आवारापन
    ये गुलिस्ताँ थमा
    वो चले गए
    राहों ने कब रोके रिश्ते
    दूर तक आवाजों के अनछुए स्पंदन सुना
    वो चले गए
    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 2w

    गुलाबी देह की बातों में न जाइए
    मिट जाएगा ये वो दरिया पहचानिए
    सो गया अम्बर सो गई रातें
    गहराइयों में धरा की रम जाइए
    उलझ कर रह गई लटों में उल्फतें
    शायद ये भी भृम था मान जाइए
    कोशिश करो चमकेगा जर्रा - जर्रा
    नीली अजब रोशनी में डूब जाइए
    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 3w

    डूब कर फिर किनारे आ जाती हूँ
    एक महीन सा है तेरी रहमत का धागा
    बेअसर होते हर जख्म इस पथ्थर बदन पर
    जोग जबसे तेरी मोहब्बत का लागा
    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 3w

    तुम डटी रहना
    एक सख्त मीनार की तरह
    गिराने बहुत आदम आएँगे
    बुझी हुई आग में अंगारा ढूँढ
    तुम्हे तिल तिल जलाएँगे
    तुम उभरनाऔर तैरना
    इन दरियाओं पर सँभलकर
    नावों में सुराख बनाने
    बहुत आएँगे
    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 3w

    तुम आए
    और चले गए
    लाए संघर्षों की बूँदें
    और घनघोर अँधेरे
    एक आस की ज्योत
    और तुम्हें जी लिया
    तुमने घावों को कुछ कम भी किया
    तुम ही तो बन गए थे सबसे बड़े नासूर
    कैफियत से गुजरे दिन रात
    परदेशी की तरह
    डरों ने मुँह तक आगाज किया
    पाँवसे कैसे निकलती है जमीं अनुभव किया
    तुम आने वालों से कहना
    तेरा कड़वापन मिटा दे
    पर तुझे याद करेंगे २०२०

    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 3w

    खल्लड़ में कूटी यादें सीकड़ी में जलाई
    एक हवा के झोंके से फिर वो मेरे पास आई
    बोली क्यों मिटाते हो मुझे
    जन्मों साथ रहना चाहती हूँ हमने कहा बन्धन नये हो गए पुराने सपने खो गए तुम बहुत सताती हो
    मुस्करायी यादें बोली मेरे सहारे तुम जी रहे हो
    अनुभवों को क्यों खो रहे हो
    मिट जाएगा अस्तित्व न रह पाएगा
    भला मुझ जैसी दवाई कोई छोड़ता है
    संचरित हो रहे रक्त को कोई मोड़ता है
    संजीवनी हूँ में संजीवनी
    सीकड़ी में पानी डाला
    फिर यादों में खो गया

    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 5w

    कुफ्र किया न कबूलनामा
    हम तल्ख इतने हो गए
    गाफिर हो या हमदर्द
    हम रहे न हम मक्बूल वो हो गए
    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 5w

    उस घर की नींव में दफन है कई किस्से,
    सुने - अनसुने वाक्या।

    खंबों से गुजरती हैं, अनदेखी विचलित करने वाली तरंगे।

    अर्धसूखी गीली सी जमीं मुस्कराती है अपने आने वाले मेहमान पर।

    घर के पिछवाड़े कुआँ जो अभी तक सूखा नहीं याद दिलाता है जिंदगी।

    खिड़की, रोशनदान, दरवाजे सलीखों से खड़े राह देखते हैं तुम्हारी।
    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 5w

    चिड़िया बड़ी हो गई,
    अब उसे माँ की जरूरत नहीं,
    माँ तलाशने निकली फिर जिंदगी।

    गल्त ये नहीं वो आते हैं,
    बात इतनी तुम जा नहीं पाते।
    ©zindagiin2lines

  • zindagiin2lines 6w

    वक्त से मांग लेते हैं दो पल
    शाम होती जिंदगी का कुछ तो निकले हल

    चलोबैठ जाते हैं एक दूसरे के साथ
    आँखों में भर के प्यार अपरम्पार

    मीटिंग के बहाने
    स्कूटर पर यूं ही हवा खाने

    चलो चले मेले
    मुस्कराते बच्चे देख जी ले

    आइसक्रीम का जशन मनाने
    उस मौसम के बहाने

    रंग बिरंगे गुब्बारे देख ललचाए
    जैसे सोने का महल देख भरमाएं

    समेट औपचारिकताओं की पोटली
    त्योहारों पे करे धमाचौकडी़

    दिल को बग्घी बना मन के घोड़े दोडा़
    चलो उड़ चले
    ©zindagiin2lines